डीएवीपी द्वारा जारी वर्तमान विज्ञापन नीति पर तत्काल रोक लगाए सरकार:-शास्त्री

ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री जी ने कहा की सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी प्रिंट मीडिया विज्ञापन नीति-2020 अखबार वालों के विरुद्ध है जिसका विरोध करते हुए श्री शास्त्री जी ने इस नीति को तत्काल रोक लगाने की प्रधानमंत्री से मांग की

साथ ही यह भी कहा कि ज्ञापन ब्यूरो आॅफ आउटरीच कम्यूनिकेशन (डीएवीपी) के महानिदेशक द्वारा जारी विज्ञापन नीति एकदम मनमानी है। यदि इस नीति को तत्काल नहीं रोका गया तो देश भर के हजारों प्रकाशको एवं एसोसिएशन के देशभर के पदाधिकारी एवं सदस्यों द्वारा डीएवीपी आफिस पर एकत्रित होकर इस नीति का पुरजोर विरोध किया जाएगा।

शास्त्री जी ने कहा है कि देश कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है और राष्ट्रव्यापी लाॅकडाडन के कारण प्रिंट मीडिया क्षेत्र संकटकालीन और बदहाली व लड़खड़ाते दौर से गुजर रहा है, ऐसे में नई विज्ञापन नीति जारी करना गला घोटने जैसा है। नई विज्ञापन नीति देश के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार करने और उसे दबाने की खड़यंत्र कारी साजिश है।

शास्त्री जी ने इस नीति को लघु एवं मझोले समाचार पत्रों पर यह कुठाराघात बताया और इसे सरकार को बदनाम करने की सोची-समझी रणनीति बताई और डीएवीपी द्वारा जारी प्रिंट मीडिया विज्ञापन नीति-2020 का देश भर के प्रकाशकों के विरुद्ध है। डीएवीपी अपनी 2016 में जारी विज्ञापन नीति में की गई मनमानी से संतुष्ट नहीं हुई तो 2020 में नई नीति जारी कर दी, जो सरासर अन्याय है।

दिनांक - 26.07.2020 को कोराना काल में काव्य सृजन महिला मंच, दिल्ली का बेहद शानदार और जानदार प्रथम ऑन लाइन कवि सम्मेलन



वर्ष - 2019 में स्थापित काव्य सृजन महिला मंच, भारत के संस्थापक श्री शिव प्रकाश जौनपुरी जी के मार्गदर्शन में  "काव्य सृजन महिला मंच "  गत दो वर्षों से निरंतर साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां कर रहा है। उसी क्रम में वर्ष - 2020 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर काव्य सृजन महिला मंच द्वारा  "दिव्यांग समर्था " सम्मान समारोह का आयोजन किया जाना था जो संपूर्ण विश्व में व्याप्त कोरोना वायरस महामारी के कारण स्थगित करना पड़ा क्योंकि चलना और चलते रहना ही सृष्टि का नियम है तो उसी फेहरिस्त में इस कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण काल में भी रचनात्मकता को बचाए और बनाए रखते हुए
 "काव्य सृजन महिला मंच"  दिल्ली की पश्चिमी दिल्ली, इकाई द्वारा कारगिल विजय के शौर्य व पराक्रम दिवस के अवसर पर रविवार, दिनांक - 26/07/2020 को ऑन लाइन, काव्य गोष्ठी का बहुत ही शानदार व जानदार आयोजन किया गया।

"काव्य सृजन महिला मंच"  की राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ0 संगीता शर्मा  'अधिकारी '  इस ऑन लाइन कवि गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं और उनकी गरिमामय उपस्थिति में काव्य सृजन महिला मंच, दिल्ली की पश्चिमी दिल्ली इकाई द्वारा इस प्रथम शानदार ऑन लाइन, काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। 

किसी भी कार्य की निर्विघ्न समाप्ति के लिए हम उस परमपिता परमात्मा का स्मरण करते हैं और उसी क्रम में काव्य सृजन महिला मंच द्वारा आयोजित काव्य की इस फुहार का शुभारम्भ काव्य सृजन महिला मंच, सचिव, यश जैन जी ने भावपूर्ण सरस्वती वन्दना से किया।  जिसको सफलता की ओर लें जाते हुए काव्य सृजन महिला मंच, पश्चिमी दिल्ली की अध्यक्ष श्रीमती सुलेखा अग्रवाल जी ने अपनी काव्यात्मक अभिव्यक्तियों के साथ बेहतरीन संचालन से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई ।

सावन के इस मनभावन उत्सव और कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अभिव्यक्ति की दोहर को जीते हुए मन के मनके तराशने के लिए एक नई उमंग व उत्साह के साथ सभी कवयित्रियों ने प्रेम, समाज, बेटियों, माँ, प्रकृति, त्योहार और राष्ट्र - प्रेम आदि पर आधारित एक से बढ़कर एक रचनाएं पढ़ी और सभी ने काव्य पाठ का भरपूर आनन्द उठाया।

काव्य सृजन महिला मंच, पश्चिमी दिल्ली के द्वारा आयोजित इस ऑनलाइन काव्य गोष्ठी कार्यक्रम में आमंत्रित चार सम्मानित कवयित्रियों यथा सुश्री डॉ पूजा सिंह गंगानिया, सुश्री सीमा दहिया, सुश्री डॉ पंकज, सुश्री नीतू पांचाल के साथ - साथ आयोजन की संचालक श्रीमती सुलेखा अग्रवाल, संयोजक श्री यश जैन तथा इस काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ0 संगीता शर्मा अधिकारी ने भी अपनी - अपनी कलम से निकले हुए शब्दों से सभी के मन को मोह कर इस कार्यक्रम को एक नई पहचान देते हुए सभी श्रोताओ को काव्य पाठ का आनंद कराया तथा अपने शब्दों की मिठास और कलम से फैली हुई चारो ओर उजास से इस कार्यक्रम को एक उच्च स्तर पर सम्मान दिलाकर काव्य गोष्ठी के नए प्रतिमान स्थापित किए। साथ ही अपनी काव्य रस की वर्षा से सभी को मंत्रमुग्ध कर आनन्दित किया।

सभी गरिमामय सम्मानित कवयित्रियों के साथ साथ श्रीमती उषा शर्मा जी, श्री पंकज तिवारी जी, सुश्री श्रुति आदि सभी साहित्यकारों की गौरवांवित उपस्थिति ने काव्य गोष्ठी को सफल बनाया।

" काव्य फुहार "  की इस यात्रा में शामिल सभी आमंत्रित सम्मानित कवयित्रियों तथा आयोजन के संयोजक व संचालक को प्रोत्साहन एवं उत्साहवर्धन हेतु स्मृति चिह्न के रूप में काव्य सृजन महिला मंच, सामाजिक - साहित्यिक - सांस्कृतिक संस्था द्वारा  " प्रशस्ति पत्र "  प्रदान किया गया जिसमे उनकी गौरवमयी भूमिका को प्रणाम करते हुए उनके  रचनात्मक सहयोग और दीप्तिमान - प्रेरक व उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। 

काव्य सृजन महिला मंच संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष और इस काव्य गोष्ठी की मुख्य अतिथि डॉ0 संगीता शर्मा अधिकारी ने अपने वक्तव्य में सभी को प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया और काव्य सृजन महिला मंच संस्था से जुड़ने का आग्रह करते हुए कहा कि " आप सब तो इस साहित्यिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सेवाभाव से जुड़ें ही और अन्य दूसरे लोगों को भी जुड़ने के लिए प्रेरित करके न केवल साहित्य अपितु संस्कृति का भी संवर्धन करते हुए समाज सेवा में भी एक अहम और बहुमूल्य योगदान दें। उन्होंने यह भी कहा कि आप सभी के स्नेह और सहयोग से ही काव्य सृजन महिला मंच भविष्य में भी इसी प्रकार के अनेक रचनात्मक आयोजन करता रहेगा और साथ ही साहित्य की दुनिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाते हुए संस्था को सफलता के शिखर तक पहुंचाएगा। "

अंत में सभी लब्धप्रतिष्ठित - सम्मानित कवयित्रियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम का बहुत ही शानदार और सफलतापूर्वक समापन किया गया।

रक्षाबंधन :- रश्मि शुक्ला



सब पर्व से प्यारा पर्व है रक्षा बंधन का पर्व।
जीवन भर साथ निभाना भाई भूल न जाना मनाना रक्षा बन्धन का पर्व।
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई भाई बन  आशीर्वाद देता रक्षा बंधन का पर्व।
इस वर्ष बड़ा विशेष बन कर आया मनाये रक्षा बंधन का पर्व ।
मास्क लगाकर रहना भाई बहन कर रही निवेदन रक्षा बंधन का पर्व ।
सेनेटाईजर साथ में रखना समाजिक दूरी तभी सफल रक्षा बंधन का पर्व ।
घर के पकवान बहन बनाये भाई खाए और मुस्काये रक्षाबंधन का पर्व ।
अपने कर्तव्यों का पालन करना है देश की सेवा रक्षा बंधन का पर्व ।
लॉक डाऊन में राखी न बाँध पाये तो नाराज़ न भाई रक्षाबंधन का पर्व।
कोरोना महामारी मिटाने बना भाई कोरोना योद्धा रक्षा बंधन का पर्व ।
करे दुआयें नजर उतारे जीवन हो खुशियो से भरा रक्षा बंधन का पर्व ।
रोचना तिलक आरती उतारे बहन उपहार मिले रक्षा बंधन का पर्व ।
जुग जुग जीये मोरा भैया कामना करे   सबकी कृपा हो रक्षा बंधन का पर्व ।
भाई की कलाई में" रश्मि" ने प्यार की रेशम की डोर बाँधा रक्षाबंधन का पर्व
बहना हुई  सौभग्यशाली भैया मिला गौरवशाली रक्षाबंधन का पर्व ।
शुभ कलाई ,शुभ राखी शुभ घड़ी आई सब मनाये रक्षाबंधन का पर्व ।

              डॉ. रश्मि शुक्ला
                प्रयागराज
                उत्तर प्रदेश

"सावन आया... न तन भीगा, न मन भरा" :- डॉ. कुसुम पांडेय

आधा अधूरा मानसून आ गया लेकिन मदमस्त झूमता सावन नहीं आया। न तन भीगा न मन नहाया, न मिट्टी की सोंधी खुशबू फूटी न मोर नाचे ना कोयल की कू कू सुनाई दी। कजरी और राग मल्हार भी बस यूट्यूब पर ही सुनाई दिए।
 इस बार तो बहू बेटियां भी मायके नहीं जा पाई  बस पिया की दो टकियो  की नौकरी पर ही आफत आई तो बोलो सखी कैसे मनाए सावन???

सावन संयम तोड़ता है। बादलों तक में संयम नहीं रहता, कभी भी बरस पड़ते हैं लेकिन वह भी कुछ दिन से बहका रहे हैं। नदियाँ  जरूर उफनने लगती है। बांध तोड़ बहती हैं। हां प्रकृति तो अपने सौंदर्य के चरम पर है। उसका सोलह सिंगार दिखता है। अंतहीन हरियाली दिखती है," रिमझिम रिमझिम आई सावन की बहार रे"

सावनी फुहार प्रेमी जोड़ों को प्रेम रस में भिगोती है। मन की नदियां बांध लांघ बहती हैं। सखियों संग झूला कजरी, नाच गाने का माहौल रहता है। घर घर से गुलगुले, मालपुए और पकौड़ियों की खुशबू आती है।
 मान मनुहार का भी सावन आता है। इस कजरी में--- तुम को आने में तुमको बुलाने में कई सावन बरस गए साजना"

आयुर्वेद भी मानता है कि सावन में मनुष्य के भीतर रस संचार ज्यादा होता है। साधु संत भी इस दौरान समाज से कटकर चौमासा मनाते थे। सावन माह में शिव पूजा का विशेष महत्व है। सावन प्रकृति और मनुष्य के रिश्तो को समझने और उसके निकट जाने का भरपूर मौका भी देता है।

लेकिन दुख है कि अब पहले जैसा सावन नहीं आता बारिश की टपकती बूंदों की आवाज जो मन को आनंदित कर देती है, कागज की कश्ती भी  अब तरसती है बारिश के पानी के लिए। हां अब कागज की नाव चलाने वाले बच्चे भी नहीं हैं। अब वह सब पुरानी बातें लगती हैं।

धार्मिक लिहाज से भी यह महीना उत्तम माना जाता है। सावन में ही समुद्र मंथन हुआ था। शिवजी ने इसी महीने में विषपान किया था, इसीलिए यह पूरा माह  भोले बाबा को समर्पित है।

अबकी मानसून धोखा दे गया। बादल ने समूचे मौसम विभाग को छकाया है।उसे झूठा  साबित कर दिया। वो लहरेदार बारिश को मन तरस रहा है। बादल आए तो लेकिन दबे पाव वापस लौट गए।

वैसे भी इस बार तो सावन को कोरोना ने  डस लिया है। कोरोना  का असर साफ दिख रहा है। शारीरिक दूरी और सावन नहीं---- यह तो महीना ही सखियों संग हंसी ठिठोली का है। पर अभी कुछ किया भी नहीं जा सकता है ।

वैसे भी अब सावन तो आता है पर मन में उमंग नहीं भरता क्योंकि मिट्टी की खुशबू को मन तरसता है। पेड़ों पर पड़े झूलों को याद करता है। कजरी की हंसी ठिठोली ढूंढता है। जहां रिश्तो में नोकझोंक के साथ प्यार और मनुहार भी हुआ करता था। कोई दिखावा नहीं होता था। सभी रिश्ते सामाजिकता और व्यावहारिकता से भरे रहते थे।

पर कोई बात नहीं,इस  आशा के साथ कि अगला सावन बहुत उत्साह पूर्ण होगा और पुराने दिन फिर से वापस आएंगे, तो चलिए हम कोरोना महामारी
 का ध्यान रखते हुए बचाव के नियमों का पालन करते हैं। जिससे इस महामारी से बचा जा सके क्योंकि सिर्फ सरकारी प्रयासों और डॉक्टरों के ऊपर ही सारी जिम्मेदारी डाल देना बिल्कुल भी उचित नहीं होगा।

तीज त्योहार अब इस इस साल घर पर ही मनाना है। मन को मयूर बनाकर नचाना है। जो है, जैसा है, उसी रूप में मन को खुश करते हुए बचा हुआ सावन  मनाना है।

डॉ. कुसुम पांडे
वरिष्ठ समाजसेवी, अधिवक्ता एवं लेखिका

राष्ट्रीय पत्रकार आयोग का भी गठन करें सरकार:- शास्त्री

ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री जी ने सरकार से मांग किया है कि जिस प्रकार से देश मे अन्य विधा के लोगों की सुविधाओं के लिए बने आयोग कार्य कर रहे हैं उसी प्रकार से पत्रकारों के लिए भी राष्ट्रीय पत्रकार आयोग (नेशनल जर्नलिस्ट कमीशन) का भी गठन होना चाहिए। जिससे अन्य आयोगों द्वारा लाभ पा रहे लोगो की भांति पत्रकारों को भी सुरक्षा आदि सुचारू रूप से मिल सके।

श्री शास्त्री जी ने कहा कि पत्रकारों पर बढ़ते हमले एवं फर्जी मुकदमे को दृष्टिगत रखते हुए सरकार को जल्द राष्ट्रीय पत्रकार आयोग एवं पत्रकार सुरक्षा कानून व नेशनल जर्नलिस्ट रजिस्टर बनाना चाहिए,  इसके साथ ही शास्त्री जी ने P.C.I का अधिकार बढ़ाने और इलैक्ट्रानिक मीडिया को दायरे में लाने के लिए एवं मीडिया काउंसिल  बनाने की भी बात कही,  पत्रकारों की हत्या एवं उनके ऊपर हो रहे हमले व फर्जी मुकदमो को रोकने के लिए भारत सरकार एवं देश की राज्य सरकारे तत्काल प्रभावशाली दिशा निर्देश जारी करें।

देश के विभिन्न आयोग अपने अपने निर्धारित कार्य क्षेत्रों  के तहत देशभर में कार्य कर रहे हैं और इनसे संबंधित लोग लाभान्वित भी हो रहे हैं लेकिन बहुत खेद व अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि पत्रकारों के लिए ऐसा कुछ भी नहीं है? शास्त्री जी ने सरकार से पुनः मांग करते हुए कहां है कि उपरोक्त की भांति राष्ट्रीय पत्रकार आयोग का भी गठन किया जाए जिससे पत्रकारों को उनकी सुरक्षा आदि सुविधाएं मिल सके और पत्रकारों का कानूनी तौर पर परिभाषा भी तय हो सके।

साथ ही श्री शास्त्री जी ने यह भी कहा कि इसी के साथ देश में नेशनल जर्नलिस्ट रजिस्टर, मीडिया काउंसिल एवं पत्रकार सुरक्षा कानून भी तैयार हो जाएगा। इससे यह लाभ होगा कि सरकारो द्वारा पत्रकारों के लिए चलाई गई कोई भी योजना पत्रकारों को नियम कानून के तहत मिल सकेगी। नहीं तो पत्रकारो को सही सुविधा मिलना बहुत  कठिन हो जाएगा। पत्रकारों के लिए बने नियम कानून को कड़ाई से लागू होने के लिए बात कही, जिससे देश में संविधान रक्षकों, कलम के सिपाहियों, राष्ट्रप्रेमियों को सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को जनता तक एवं जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने में किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो।

आँल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा भारत सरकार एवं देश के सभी राज्य सरकारों से बराबर पत्रकारों के हितो एवं समस्याओं व पत्रकारों के उत्पीड़न एवं उनके ऊपर हो रहे फर्जी मुकदमे व उनकी हत्या से संबंधित हो, चाहे कोरोना काल मे पत्रकारों के संकट का हो, P.C.I. के चुनाव कराने, पत्रकार एमएलसी का कोटा, नेशनल जर्नलिस्ट रजिस्टर बनाने की मांग हो, मीडिया काउंसिल एवं पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने के लिए एसोसिएशन द्वारा प्रार्थना पत्र जरिये रजिस्ट्री के माध्यम से एवं देश के हजारों हजार सम्मानित अखबारो मे पत्रकारों की समस्याओं को प्रकाशन के माध्यम से व सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म के माध्यम से उठाया जा रहा है।

"बस्ते का बोझ कम--- एक अच्छी शुरुआत"



कुछ दिन पहले ही सीबीएसई बोर्ड ने अपने पाठ्यक्रम में 30% की कटौती की है और पिछले हफ्ते ही भारत के सबसे बड़े बोर्ड यूपी बोर्ड ने भी पाठ्यक्रम कम करने की घोषणा की है जो कि शिक्षा क्षेत्र में एक बहुत अच्छी खबर है।   
हमेशा कहा जाता है कि सुनहरे भविष्य का रास्ता तो स्कूलों से निकलकर जाता है और किसी भी देश का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी शिक्षा की गुणवत्ता किस स्तर की है। उससे बच्चों को वास्तव में कितना कौशल सीखने को मिल रहा है और शिक्षा की व्यवस्था उचित ढंग से हो रही है।

लेकिन बहुत सालों से चली आ रही है शिक्षा व्यवस्था इस महामारी के चलते असमंजस में पड़ गई है। इस कोरोना  महामारी ने पूरे विश्व में 200 करोड़ बच्चों की शिक्षा को प्रभावित किया है। कभी सुनने में नहीं आया था कि बोर्ड की परीक्षा ना हो पाई  हों लेकिन कोरोना काल में सच में ऐसा हो ही गया है। अभी आगे की स्थिति भी बहुत स्पष्ट नहीं है।

स्कूल कब खोले जाएं??? क्या बच्चों को स्कूल भेजा जाए??? बच्चे स्कूल में कितने सुरक्षित हैं??? आज बहुत सारे ऐसे प्रश्न हैं  जिससे अभिभावक, स्कूल प्रशासन दोनों ही परेशान हैं और दोनों की घबराहट उचित भी है क्योंकि बच्चों को खतरे में तो कोई भी नहीं डालना चाहेगा।

बच्चे स्कूल नहीं जा पाए तो स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करवा दिया लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई की भी अपनी सीमाएं हैं। हां यह जरूर है कि खाली बैठने से यह विकल्प अच्छा ही है और सामान्य परिस्थितियों में भी ऑनलाइन शिक्षा ने  अपना स्थान बना लिया है और इसका सकारात्मक उपयोग बड़े से लेकर छोटे बच्चों तक सभी के साथ हो रहा है और आगे भी होता ही रहेगा।

इस समय की सबसे बड़ी समस्या है 2020- 2021 सत्र के लिए बच्चे किस प्रकार से तैयार किए जाएं। अनिश्चय की स्थिति से कैसे बाहर निकाला जाए?? ऐसे में सीबीएसई बोर्ड ने पाठ्यक्रम में 30% भाग को अध्यापन और मूल्यांकन से बाहर कर दिया है। इस निर्णय से स्कूल के बच्चों में एक नए उत्साह और प्रसन्नता की लहर दौड़ गई है।

यूपी बोर्ड ने भी पाठ्यक्रम कम करने की घोषणा कर दी है और उम्मीद है कि सभी राज्यों के बोर्ड भी जरूर ऐसा फैसला करेंगे।

बस्ते का बोझ पिछले 30 वर्षों से चर्चा का विषय रहा है। जब हमारे बच्चे छोटे थे तो भी लगता था कि कैसे अपने वजन से ज्यादा का बैग पीठ पर लादे हैं और बहुत सारे अध्याय तो स्कूल में पढ़ाये भी नहीं जाते थे, बस मोटी मोटी किताबें और मजदूरों जैसे ढोते बच्चे।

इस समय देश में स्कूली शिक्षा में 2005 में बनाए गए पाठ्यक्रम और उसके अनुसार बनी पाठ्यपुस्तक से ही चल रही हैं, लेकिन यह सही नहीं है। सजग और सतर्क देशों में पाठ्यक्रम और पुस्तके हर 5 वर्ष में बदली जाती हैं और आज के इस दौर में इसकी महत्ता सबको समझ आ रही है।

हमारे देश में प्राचीन काल में गुरुकुल शिक्षा पद्धति थी। जिसमें सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं वरन्  व्यक्तित्व निर्माण पर पूरा ध्यान दिया जाता था। जो जिस गुण में निपुण हो उसी के अनुरूप उसको अवसर मिलता था और आज के समय में भी कौशल शिक्षा का महत्व ही दिखाई पड़ रहा है।

ऐसे में बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए, शिक्षा को लाभप्रद बनाने के लिए उसको बोझ ना बना कर अपितु रुझान पैदा किया जाए जिससे  इस गला काट प्रतिस्पर्धा से बच्चे थोड़ा राहत पा सकें।

शिक्षा का बोझ कम होने से बच्चों को अपनी रूचि के अनुसार कार्य करने का भी समय मिल सकेगा जिससे उनका भविष्य सुनहरा होगा और अभिभावकों को भी सुकून मिलेगा।
धन्यवाद

डॉ. कुसुम पांडेय
वरिष्ठ समाजसेवी अधिवक्ता एवं लेखिका

बार काउंसिल के तर्ज पर, प्रेस काउंसिल भी कराए चुनाव:- शास्त्री

ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री जी ने सरकार से मांग किया है कि जिस प्रकार से देश मे बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा देश, प्रदेश, जिला व तहसील स्तर पर बाकायदे चुनाव कराया जाता है, उसी प्रकार से प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को भी चुनाव कराए जाने की व्यवस्था एवं अधिकार दिया जाना चाहिए। जिससे प्रेस काउंसिल भी पत्रकारों का चुनाव करा सके। डाक्टरों व अधिवक्ताओं के लिए उनके-उनके काउंसिल अपने-अपने स्तर से देश भर में बाकायदे चुनाव कराती है और निर्वाचित पदाधिकारी देश, प्रदेश एवं जिला स्तर पर अपने विधा के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करते हैं, लेकिन अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि पत्रकारों के लिए ऐसा कुछ भी नहीं है?

श्री शास्त्री जी ने भारत सरकार से मांग करते हुए कहा है कि उपरोक्त की भांति P.C.I. को संसाधन सहित अधिकार जारी करें जिससे प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया भी पत्रकारों को अधिकार दे सके।  जिस प्रकार से देश की उपरोक्त संस्थाएं अपने विधा के लोगों का चुनाव कराती है उसी प्रकार से प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया भी पत्रकारों के लिए देश और राज्य में चुनाव संपन्न कराएं, इससे यह फायदा होगा कि जिस प्रकार से अधिवक्ताओं, डॉक्टरों आदि की समस्याओं के निदान हेतु उनके उनके विधा के लोग कार्य करते हैं उसी प्रकार से पत्रकारों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से निर्वाचित लोग भी देश, प्रदेश व जिला स्तर पर कार्य कर सकेंगे। जिसके साथ ही पत्रकारों का कानूनी तौर पर परिभाषा भी तय हो सकेगा, अभी तक पत्रकार मात्र नाम का चौथा स्तम्भ है।

साथ ही श्री शास्त्री जी ने यह भी कहा कि इसी के साथ देश में नेशनल जर्नलिस्ट रजिस्टर भी तैयार हो जाएगा। इससे यह लाभ होगा कि सरकारो द्वारा पत्रकारों के लिए चलाई गई कल्याणकारी योजना पत्रकारों को सुचारु रुप से मिल पाएगी। नहीं तो पत्रकारो को वास्तविक सुविधा मिलना असंभव हो जाएगा। साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बने नियम कानून भी कड़ाई से लागू हो जिससे देश के पत्रकार राष्ट्रहित न्यायपूर्ण बिना दबाव के अपना कार्य कर सके।

श्री शास्त्री जी ने यह भी कहा कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभों की तरह  चौथे स्तंभ (पत्रकारो) को भी सारी सुविधाएं मिलनी चाहिए, इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार से देश के अन्य विधा के लोगो का एक कानून और एक नियम है उसी प्रकार से पत्रकारों का भी एक नियम, कानून होना चाहिए। देश का हर पत्रकार राष्ट्रहित सर्वोपरि रखते हुए अपने दायित्वों का पूरा का पूरा निर्वहन करता है, इसके बाद भी उसके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव रखना बहुत ही दुःखद है।

*गाजियाबाद की बेपरवाह पुलिस की लापरवाही से, गुंडो, लफंगो, मवालीयो, हिस्ट्रीशीटरो, कुख्यात अपराधियों ने एक कलम के सिपाही एवं संविधान के रक्षक वरिष्ठ पत्रकार को निरअपराध मौत के घाट उतार दिया।*


🖋"ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन"🗞 एवं मान्यता प्राप्त पत्रकार प्रयागराज मंडल परिवार ने मौत के शिकार हुए वरिष्ठ पत्रकार विक्रम जोशी के आश्रितों को उचित सहयोग राशि(₹ 50 लाख) दिए जाने तथा दोषी पुलिस एवं अपराधियों के खिलाफ कड़ी करवाई की मांग की है।

विगत 16 जुलाई को उपरोक्त बदमाशो ने वरिष्ठ पत्रकार की भांजी से विजय नगर में छेड छाड़ की। जानकारी मिलने पर तुरंत उसकी सूचना पुलिस को टेलीफोनिक माध्यम से एवं 17 जुलाई को लिखित प्रार्थना पत्र स्थानी एवं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

20 जुलाई को रात जब अपनी बहन के यहां खाने पर गया, वहां घर के पास बदमाश मंडरा रहे थे तथा उन्होंने विक्रम जोशी को घुड़काया। वह अनसुनी करके अपनी बहन के घर चले गये। वहां से उसने पुलिस को फोन पर खतरे के प्रति आगह किया। पुलिस ने वहाँ आने असमर्थता व्यक्त कर दी।

खाना खाकर रात्रि करीब 10.30 बजे वापस लौट रहा था। बहिन के घर से करीब 200 मीटर दूर 3 बाइकों पर सवार बदमाशों ने उसको घेरकर बाइक गिरा दी और बेटियों के सामने ताबड़तोड़ पिटाई करके गोली मार दी।
बेटियों का हाल बेहाल था।
जिन बेटियों के सामने उनके पिता की पिटाई और गोली मारी गयी हो,उसकी अपार वेदना वही झेल रही थी। वें अभी तक डरी-सहमी है।

मरणासन्न पत्रकार विक्रम जोशी को शारदा हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया।
22 जुलाई को सुबह वरिष्ठ पत्रकार विक्रम जोशी के प्राण पखेरू उड़ गए। यदि समय रहते पुलिस कार्रवाई करती तो आज यह सब नही देखना पड़ता।
उसकी मौत की जिम्मेदार केवल-केवल पुलिस तन्त्र है।

परम पिता परमात्मा से प्रार्थना है मृतक की आत्मा को अपने चरणों मे स्थान देकर चिर शाँति और आश्रितों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे।
🙏🏻ॐ शाँति🙏🏻ॐ शाँति🙏🏻ॐ शाँति🙏🏻

आचार्य श्रीकांत शास्त्री
वरिष्ठ पत्रकार 
अध्यक्ष:- ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन

"मन, वचन और कर्म से करें --भू जल संरक्षण"


 देश के सबसे बड़े प्रदेश में भूगर्भ जल सप्ताह मनाया जा रहा है। इस अनमोल प्राकृतिक संसाधन को बचाने के लिए जल दिवस से लेकर ऐसे तमाम दिन तय किए गए हैं, लेकिन इन दिनों की सार्थकता तभी साबित होगी जब हम इसे जिम्मेदारी समझकर इस दिशा में आगे बढ़ेंगे। तो आइए बारिश की बूंदों को सहेज कर हम अपने देश में एक बार फिर से जल देवता की परंपरा को आगे बढ़ाए।

जीवन और सृष्टि एक दूसरे के पूरक हैं पर इंसान इस बात से नादान बना हुआ है। धरती का सीना चीर कर जल का दोहन कर रहा है, और उसके संरक्षण पर अपनी आंखें फेर रहा है। "जल ही जीवन है, जल नहीं तो कल नहीं" फिर भी यदि आज हम नहीं जाग रहे हैं तो फिर कल  रोने का मतलब नहीं है, क्योंकि समय बीत जाने पर किसी बात का कोई मतलब नहीं रह जाता है। आदमी सिर्फ अपना सिर पीटता रह जाता है एक कहावत भी कही गई है कि "का बरखा जब कृषि सुखाने" अभी भी देर नहीं हुई है, जागो और लोगों को बताओ, उनके मन में पड़े पर्दे को हटाओ और जल संरक्षण के प्रति लोगों को  संवेदनशील बनाओ।
विश्व की प्रमुख सभ्यताओं से सबक लेना है कि जहां बिना जल सभ्यताएं ही समाप्त हो गई हैं। जल की कोई कीमत नहीं अदा कर सकता है।इस  अमूल्य निधि का तो संरक्षण ही एकमात्र उपाय है तो सिर्फ उपभोग नहीं वरन्  उसके संरक्षण पर भी ध्यान दें।  जल रूपी  अमूल्य निधि को बिना समय गवाएं बचा लेना है वरना पीढ़ियां नष्ट हो जाएंगी और हमारी नासमझी और गैर जिम्मेदारी की कीमत चुकाएगी।

आज सपने में जल देवता मुझे देख कर थोड़ा मुस्कुराए बोले क्यों क्या हुआ मुझे देख कर सकूंचा रही हो, चली थी मुझे बचाने पर लोगों के तानों से घबरा गई। अरे ये नादान मानव नहीं जान रहा है या फिर इस सच को नहीं मान रहा है। क्या जल बिन जीवन है, नहीं नहीं नहीं बिल्कुल नहीं,
 तेरी हर भूख प्यास, पूजा-पाठ हर जगह तो मेरी जरूरत है। मेरे  बिना तेरी सफाई कैसी,  मेरे बिना तेरी रसोई कैसी, मेरे बिना तेरे जीवन की आस भी नहीं मेरे बिना तेरे जीवन की सांस भी नहीं। भगीरथ गंगा को लाए धरती पर अपने पूर्वजों को तारने के लिए और तू भी माॅ, माॅ करके इस तथ्य को झुठला रहा है, गंगा को ही मैला बनाता जा रहा है,और यह नहीं समझ पा रहा है कि जल नहीं तो कुछ भी नहीं।

अभी जबकि कोरोना महामारी पूरे विश्व में छाई है, ऐसे में हमारे प्रदेश में जल सप्ताह मनाया जा रहा है। कोरोना, कोरोना, कोरोना  आज चारों तरफ बस एक ही नाम सुनाई दे रहा है, क्योंकि यह एक महामारी है तो सभी बहुत भयभीत हैं और जब इसके बचाव के तरीके बताए जाते हैं तो एक प्रमुख बात बताई जाती है कि हर 2 घंटे में साबुन पानी से अच्छी तरह से हाथ धोएं यहां तक कि  सैनिटाइजर से भी साबुन पानी को ज्यादा सही बताया जा रहा है, तो एक बात गहराई से सोचने की है कि अगर जल नहीं तो हम कोरोना  की लड़ाई कैसे लड़ते??? जी हां जिस तरह से हम जल के प्रति गैर जिम्मेदाराना व्यवहार करते आ रहे हैं तो क्या नहीं लगता कि भविष्य में किसी और महामारी से लड़ने के लिए पहले हमें पानी की लड़ाई ना लड़नी पड़ जाए।

बचपन से "जल ही जीवन है" सुनते आ रहे हैं,  लेकिन फिर भी हम सब इसके संरक्षण के प्रति संवेदनशील नहीं हो पा रहे हैं। जबकि सभी को पता है "बिन पानी सब सून" सारा जीवन अमूल्य प्राकृतिक चीजों पर टिका है। हवा, पानी का शुद्ध होना बहुत जरूरी है। जिसने पानी तो हर काम के लिए जरूरी है। आपकी कोई भी सफाई इसके बिना नहीं पूरी हो सकती है।

 सोचिए कि साबुन तो भरा हो लेकिन हाथ धोने के लिए पानी ना हो तो??? ऐसे में सिर्फ हाथ धोने का ना सोचे बल्कि जल बचाने के भी तरीके सोचे और उस पर भी ईमानदारी से अमल करें, क्योंकि हमारी लापरवाही आगे चलकर एक और परेशानी ना पैदा कर दे।
 यह विचारणीय है "जल है तो कल है, जल नहीं तो कल नहीं" मैं स्वत इस विषय पर बहुत संवेदनशील हूं लेकिन जब मैं दूसरों से इस विषय पर चर्चा करती हूं तो वह गंदा सा मुंह बना लेते हैं। मेरे पीछे मुझे भला बुरा भी कहते हैं। यह बात मैं जानती हूं फिर भी अपने मन को समझाती हूँ कि आज रहीम दास जी का दोहा कितना सटीक बैठता है कि "रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून पानी गए न ऊबरे मोती मानस चून"
 सैकड़ों वर्ष पूर्व कही गई ये बातें आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।उतनी ही सार्थक हैं।

स्वस्थ जीवन का आधार स्वच्छ जल है लेकिन आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी संस्कृति की सारी अच्छी बातें भूलते जा रहे हैं, और अपनी प्लास्टिक बंद सोच पर इतरा रहे हैं, जबकि सही अर्थों में हम खुद को ही मूर्ख बना रहे हैं, बहुत समय शेष नहीं अगर ऐसे ही रहा बन जाएंगे हम भी अवशेष।यह बात  सही है कि आज नहीं तो कल इंसान अपने किए पर जरूर पछतायेगा। जल का दोहन छोड़ उसे फिर से पूजने लग जाएगा, अपनी बुद्धिमता को दर्शायेगा   यूं कहिए कि अपने प्रयास को सफल बनाने में लग जाएगा, जल ही जीवन है कि वैचारिकता   को हर कोई दिल से अपनाएगा।

माना कि भूजल का आपातकाल आ गया है, फिर भी अभी भी समाधान है। भू जल संरक्षण के लिए सप्ताह भर के कार्यक्रम ही काफी नहीं हैं, यह लोगों के व्यवहार का हिस्सा होना चाहिए।
भूजल सप्ताह शुरू हो चुका है लेकिन किसी भी सरकारी पहल में जब तक जनता का  सहयोग नहीं मिलता,  योजना की सफलता संदेह के घेरे में रहती है।

भूजल का अंधाधुंध दोहन करते रहते हैं लेकिन उसके बचाव के लिए कोई प्रयास नहीं करना चाहते हैं, केवल अपील से काम नहीं बनेगा बल्कि कुछ बाध्यकारी काम बनाना होगा। इसके लिए सरकार को जरूरी और सख्त कदम उठाने होंगे। अब यह जरूरी हो गया है कि गांव हो या शहर भवन निर्माण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग के बिना नक्शे को पास न  किया जाए। सरकारी भवनों पर भी अनिवार्यता भू जल संरक्षण का प्रावधान किया जाए। गांवों में भी तालाबों को पुनर्जीवित किया जाए और जिन लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है उनसे  कब्जे को हटवा करके तालाबों का उचित रखरखाव किया जाए, जिससे कि बरसात का पानी बर्बाद ना होने पाए और लोगों के काम आ सके और धरती का जल स्तर ऊंचा होने में मदद हो सके।

 और यह सब लोगों के स्वभाव और कार्य व्यवहार का हिस्सा होना चाहिए तभी भूजल संरक्षण प्रभावी हो सकेगा।

वरिष्ठ समाजसेवी,अधिवक्ता एवं लेखिका
डॉ.कुसुम पांडेय

पत्रकारों की एकता बेहद जरूरी - श्रीकान्त शास्त्री

प्रयागराज!! जिस प्रकार से बार काउंसिल ऑफ इंडिया में  रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद अधिवक्ता पूरे देश में जहां से चाहे वहां से वकालत कर सकता है और वह स्थापित हो जाता है इसी प्रकार से मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन होने के बाद डॉक्टर को भी मान्यता मिल जाती है, लेकिन पत्रकारों के मामले उपरोक्त से एकदम उल्टा है वो ग्रामीण के है, ये तहसील के हैं, आप जिला के हैं, वो तो मंडल स्तर के है , वो प्रदेश मुख्यालय स्तर के हैं, वो देश स्तर के हैं ऐसी व्यवस्था बनाकर पत्रकारों को अलग- थलग करने की शुरू से ही एक बहुत बड़ी साजिश है।

अभी इसी तरह से एक और ट्रेंड चलाया जा रहा है कि वो बडे अखबार के हैं, आप छोटे अखबार के हैं, वो बड़े चैनल के हैं, आप छोटे चैनल के हैं, आप पोर्टल वाले हैं कह करके भेदभाव किया जा रहा है जब अधिवक्ताओं एवं डॉक्टरों की व्यवस्था एक है तो पत्रकारों में अनेक व्यवस्था कैसे इसको सही किया जाए उक्त बिगड़ी व्यवस्था को सही करवाने के लिए निरंतर प्रयासरत ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य श्रीकान्त शास्त्री कर रहे हैं उन्होंने पत्रकारों की बिभिन्न समस्याओं पर भी चर्चा करते हुए कहा कि पूरे देश के सभी प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुड़े पत्रकारों को शासन प्रशासन की नि:शुल्क रेल बस सुबिधा, नि:शुल्क चिकित्सा आवास और पेंशन जैसी आवश्यक सुविधाये दिलाने हेतु एक देश व्यापी अभियान जल्द ही चलाया जाएगा।

जिसमे सभी प्रान्तों के पत्रकारों को सदस्यता अभियान से जोड़कर जिला स्तर पर पत्रकारों की सूची प्रशासन को मुहैया कराने तथा जो पत्रकार हिंसा में अपनी जान गंवाते है उन्हें शहीद का दर्जा मिले मृतक पत्रकार के परिजनों के परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग सहित पत्रकारों के हित और कल्याण के लिए अनेक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है उन्होंने बताया की आल इण्डिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन में कोई भी पत्रकार सहभागिता निभा सकते हैं।

सहयोगी दलों के सहयोग से एनडीए तीसरी बार भी अपनी नैया पार लगाने की फिराक मे।

  आचार्य श्रीकान्त शास्त्री, वरिष्ठ पत्रकार  देश में आम चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां बड़ने लगी है और हर पार्टिया ‌अपनी ...