पत्रकार के हत्यारों को फांसी एवं पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता की घोषणा करें सरकार:- शास्त्री


ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री जी ने बलरामपुर मे पत्रकार राकेश सिंह व साथी के हत्यारों के मुकदमा को फास्ट ट्रैक कोर्ट में करने एवं पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता व परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की सरकार से मांग करते हुए कहा है कि जिस प्रकार से पत्रकार व उसके साथी की जिंदा जलाकर निर्मम हत्या की गई है, वह बहुत ही दुखद है एवं चौथे स्तंभ को दबाने की कुत्सित प्रयास है, जो बर्दाश्त नही किया जाएगा।


साथ ही श्री शास्त्री जी ने यह भी कहा कि जिस प्रकार से देशभर में पत्रकारों की हो रही हत्या, उनके ऊपर हो रहे फर्जी मुकदमे एवं उनपर हो रहे उत्पीड़न व उनको बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है यह बहुत ही दुखद एवं चिंताजनक है। यह कृत्य सीधा-सीधा चौथे स्तंभ को दबाने की खड्यंत्रकारी साजिश है जो इस प्रकार के लोकतांत्रिक देश के लिए शुभ संकेत नहीं है।



*ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन* परिवार ने सरकार से मांग किया है कि पत्रकारों पर बढ़ते हमलों, हत्या, उत्पीड़न एवं फर्जी मुकदमो को रोकने के लिए तत्काल पत्रकार सुरक्षा कानून बनाया जाए और जिसे यूपी सहित पूरे देशभर में लागू किया जाए जिससे आए दिन हो रही पत्रकारों के प्रति जानलेवा हमले एवं हत्याओं को रोका जा सके।


बलरामपुर में हुई पत्रकार को जिंदा जलाए जाने की घटना से देशभर के पत्रकारों में रोष व्याप्त है। जिसके संबंध में एसोसिएशन परिवार की ओर से मा. प्रधानमंत्री, मा. मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के विभिन्न अधिकारियों को ईमेल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पत्र भेजकर हत्यारों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता व परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग किया गया है।

"आंवला नवमी का महत्व"


आइए हम सब मिलकर आंवला नवमी का पूजन करें।

कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी या अक्षय नवमी भी कहा जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से स्त्रियां सौभाग्य की प्राप्ति करती हैं। आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करने से सौभाग्य की प्राप्ति और रोगों का नाश होता है। इस दिन किया गया सभी कार्य पुन्य देने वाला होता है। कोई भी शुभ काम जैसे दान, पूजा, भक्ति, सेवा जो भी इस दिन किया जाता है... उसका फल कई कई जन्मों तक प्राप्त होता है।

पद्म पुराण के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव जी का आंवले के पेड़ पर निवास होता है।
मां लक्ष्मी ने भी आंवले के वृक्ष का पूजन किया था। 

आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु का अति प्रिय है। आंवले के वृक्ष के स्मरण और पूजन से गोदान का फल मिलता है।

इस बार 23 नवंबर को आंवला नवमी का पर्व है। इस दिन सर्वप्रथम मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है।

एक धार्मिक मान्यता यह भी है कि आंवला नवमी से लेकर प्रबोधिनी एकादशी तक पूजन करना चाहिए और प्रबोधिन एकादशी के दिन से आंवले का सेवन करना चाहिए।जिस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा हो उस दिन उसमें से आंवले के फल नहीं तोड़ने चाहिए। 

यथा उपलब्ध पूजन सामग्री से यदि संभव हो तो आंवले के पेड़ की पूजा करनी चाहिए और साथ ही इसकी  सात परिक्रमा भी करनी चाहिए।

आंवले में बहुत सारे औषधीय गुण भी हैं। आंवले में आयरन और विटामिन सी भरपूर होता है। आंवले का जूस रोज पीने से पाचन शक्ति सही रहती है। त्वचा में चमक आती है। आंखों और बालों के एवं त्वचा संबंधी रोगों के लिए आंवला अत्यंत लाभकारी होता है।

हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति इतनी विकसित और पर्यावरण प्रेमी रही है कि जब भी हम कोई व्रत-त्योहार या पर्व मनाते हैं तो उसके पीछे जितना धार्मिक  महत्व होता है उतना ही महत्व वैज्ञानिक और प्राकृतिक भी होता है। हमारे देश में हर ॠतु, फसल, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सभी को प्रकृति मानकर पूजा जाता है।

अभी हाल ही में सूर्य षष्ठी का व्रत हुआ जो पूर्णता प्राकृतिक पूजा का ही स्वरूप है।

सही मायने में संसार की रचना भी पुरुष और प्रकृति के विशिष्ट संबंध को परिलक्षित करती है। आंवला प्राकृतिक रूप से औषधीय गुणों का भंडार है। इसीलिए देवी देवताओं ने इसके संरक्षण के लिए इस में वास करने का निश्चय किया। जिससे आंवले के वृक्ष को सुरक्षित रखा जा सके। 

आंवला औषधीय गुणों का प्रचुर स्रोत है, यही कारण है कि च्यवन ऋषि ने सबसे पहले आंवले से चवनप्राश बनाया था, जो जीवनदायिनी औषधि के रूप में होता है। च्यवनप्राश में वृद्ध को भी नवयुवक बनाने की शक्ति होती है, ऐसी मान्यता है।

तो अभी जबकि कोविड-19 का समय चल रहा है। प्राकृतिक चीजों पर हमारी निर्भरता बढ़ गई है, तो ऐसी स्थिति में हमें इन औषधीय गुणों वाले *आंवला देव की पूजा करना एवं उनका संरक्षण करना* अपने और अपनी आने वाली पीढ़ियों के हित में अत्यंत ही आवश्यक है। प्रकृति ने जो गुणों का खजाना हमको प्रदान किया है। अब बहुत ज़रूरी है कि हम सब मिलकर के उनका संरक्षण करें और अपनी आने वाली पीढ़ियों को उनके गुणों से अवगत कराएं तथा अपनी *प्राकृतिक संपदा के प्रति दयालु बने और जागरूक बने*।।

धन्यवाद
डॉ. कुसुम पांडेय
वरिष्ठ समाजसेवी अधिवक्ता एवं लेखिका

"मस्ती की पाठशाला" (Written By Dr. Kusum Pandey)

मस्ती की पाठशाला

वास्तव में क्या ऐसा संभव हो सकता है??? यह बात बार-बार मन पर एक प्रहार सा करती है। शिक्षा के नाम पर क्या मस्ती की पाठशाला चलाई जा सकती है??


आज के समय में तो यह विचार बहुत बेतुका सा लगता है क्योंकि अब तो बच्चा कुछ बोलना और समझना शुरू करें तभी से उसे ABCD रटाया जाने लगता है।

बड़े गर्व से कहा जाता है कि यह Eyes, Nose बता लेता है और साथ ही इसे मोबाइल के बिना चैन ही नहीं पड़ता तो लीजिए हमारे भोले भाले दयालु और उदार प्रकृति ने आज हमें ऐसी जगह ला खड़ा कर दिया है जहां सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है। तो मोबाइल, कंप्यूटर लैपटॉप की महत्ता अत्यंत बढ़ गई है।


ऑनलाइन स्कूल चल रहे हैं। परीक्षाएं हो रही हैं और साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य को एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।


अभी कुछ दिन पहले ही पढ़ा था कि ऑनलाइन क्लास करने से और लगातार एक जगह बैठे रहने से बच्चों में कितने मानसिक विकार पैदा हो रहे हैं और साथ ही उनकी आंखों के लिए नई समस्याएं जन्म ले रही हैं, तो ऐसे में बरबस गुजरा हुआ जमाना मतलब हमारी उम्र वालों का जमाना याद आता है जहां पढ़ाई कभी समस्या नहीं थी। 

पढ़ाई के साथ साथ मस्ती की पाठशाला भी चलती थी।


वैसे तो हमारी भारतीय संस्कृति में गुरुकुल शिक्षा पद्धति थी, जहां पर व्यक्तित्व निर्माण की शिक्षा दी जाती थी। उस समय का दौर बीता तो धीरे-धीरे बहुत से बदलावों के  बाद आजाद भारत की गुलाम शिक्षा पद्धति ने स्थान ले लिया। जहां पर बस अंग्रेज बनाने की होड़ लग गई है। आज के दौर में अगर बच्चा अंग्रेजी स्कूल में नहीं पड़ता है तो यह एक शर्म की बात मानी जाती है।

सरकारी स्कूलों में भी अंग्रेजी माध्यम के अलग कक्षाएं चलती हैं। चलिए भाषा से किसी को कोई बैर रही है, परंतु बच्चों का शोषण भाषा के नाम पर किया जाना तो सर्वथा अनुचित है।


कोरोनावायरस में एक बड़ी समस्या आई कि बच्चों की पढ़ाई कैसे शुरू की जाए?? स्कूल जाना तो अभी संभव नहीं जान पड़ता तो ऑनलाइन। बच्चे  शुरू शुरू में तो बहुत खुश हुए लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्वास्थ्य समस्याएं खासकर आंखों के लिए हानिकारक बन गई।


"जान है तो जहान है" का सिद्धांत कम से कम बच्चों के लिए तो होना ही चाहिए। यह ज्यादा उचित होता कि 1 साल की पढ़ाई बच्चों की रुचि के अनुसार कुछ क्रियात्मक कार्य करके करवाई जाती इससे ना तो अभिभावकों पर कोई आर्थिक बोझ पड़ता और ना ही बच्चों को एक ही स्थान पर बैठे-बैठे अपनी आंखों और दिमाग को ऑनलाइन करना पड़ता।


कोविड-19 में बहुत से देशों में 0 शिक्षा सत्र कर दिया गया जो कि एक सराहनीय कदम है, क्योंकि जान जोखिम में डालकर अनावश्यक आर्थिक और मानसिक तनाव की कोई आवश्यकता नहीं जान पड़ती है।


ऐसे में हमारे देश में कौन सी नौकरियों की बाढ़ आ गई है कि अगर बच्चे एक साल नहीं पढ़ेंगे तो सब नौकरियां व्यर्थ हो जाएंगी। जैसे हम सब बातों में अपने को पढ़ा-लिखा कहते हैं, तो उसी तरह बच्चों के भविष्य को लेकर भी हमें अपने अनुभव के आधार पर उनके उचित विकास के लिए अब रटन्त विद्या को छोड़कर वास्तव में मस्ती की पाठशाला पर जरूर ध्यान देना चाहिए। उनके अंदर के कौशल को निखारने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए।

 यह बहुत ही अच्छा अवसर था जबकि बच्चे पढ़ाई के बोझ से बच कर अपने अंदर छिपी प्रतिभा पर भी ध्यान दे पाते।


यह एक तरह से देश हित में भी सार्थक कदम होता, क्योंकि इतनी बड़ी जनसंख्या वाले देश में सिर्फ सरकारी, गैर सरकारी नौकरियां ही नहीं वरन व्यक्तिगत तौर पर अपने गुणों का विकास करना और उसके आधार पर अपनी जीविका के लिए आगे बढ़ने का विचार भी बहुत सहायक होता।


मस्ती की पाठशाला हर उम्र के लिए उतनी ही जरूरी है। अनावश्यक तनाव से कार्यक्षमता पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, फिर वह चाहे किसी भी उम्र का हो। अभी भी समय है जो बीत गया उससे अनुभव लेते हुए अपने देश के युवाओं और बच्चों के लिए एक स्वस्थ वातावरण को तैयार करना नितांत आवश्यक ही नहीं वरन् हम सबकी जिम्मेदारी भी है। 


देश का भविष्य इन्हीं बच्चों और युवाओं के हाथों में है, तो हमारे अनुभव का लाभ भी तो उनके लिए उतना ही जरूरी है क्योंकि अगर हमने तनाव रहित वातावरण का सुख पाया है तो हमारी इस पीढ़ी को और आगे आने वाली पीढ़ियों को भी वही सुख पाने का पूरा अधिकार है। 


अनुभव भी यही कहता है कि जब से सरकारी नौकरियों को ज्यादा वरीयता दी जाने लगी है तबसे बेरोजगारी लगातार बढ़ती ही जा रही है।

फिर क्यों ना अपनी प्रतिभा को ही अपने जीवन यापन का आधार बनाया जाए और यह तभी संभव है, जब इस गला काट प्रतिस्पर्धा से हटकर सभी स्व रोजगार की तरफ अपना ध्यान दें। कुछ पाने के लिए कुछ नया सोचना और उसे क्रियान्वित करना तो हर तरह से उचित ही जान पड़ता है।

धन्यवाद

डॉ. कुसुम पांडेय

वरिष्ठ अधिवक्ता समाजसेवी एवं लेखिका

*मन ही मन का सच्चा मीत* (By Dr. Kusum Pandey)

मानव चरित्र का सबसे प्रधान स्वरूप मन है। भगवान ने भी धरती पर अवतार लेकर लीला करने के लिए मन बनाया, क्योंकि ईश्वर तो निर्गुण होते हैं और भगवान ने जब मन बनाया तभी इस सांसारिक लीला में तल्लीन हो पाए।


मानव जीवन अमूल्य है लेकिन मनुष्य बहुत जल्दी हताश और निराश हो जाता है। इस भौतिकवादी युग में मनुष्य हर वस्तु जल्दी से जल्दी प्राप्त कर लेना चाहता है। इस चाहत के चलते उसे जब अभीष्ट की प्राप्ति नहीं हो पाती तो वह निराश हो जाता है और अपने अमूल्य जीवन तक को ही नष्ट करने की ठान लेता है। हमें सदैव यह मानकर चलना चाहिए कि *मन से बड़ा न कोय*

आजकल मानसिक स्वास्थ्य भी एक बहुत बड़ी समस्या है। कोविड-19 में मनुष्य के लिए मानसिक सेहत की चुनौती को और बढ़ा दिया है। हालांकि जितना ध्यान हम शरीर की बीमारियों को दूर करने के लिए करते हैं, उतना ही अनदेखी मन की सेहत के लिए करते हैं।

यह एक चेतावनी भी है कि यदि हम शरीर की तरह मन की सेहत को लेकर सजग नहीं हुए तो हमारी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यदि हमारे सब्र और संकल्प का बांध टूट रहा है तो याद रखें यह हमारी मनोदशा को और खराब कर सकती है।

ऐसी स्थिति में हमें यह सकारात्मक विचार लाने की जरूरत है, कि सिर्फ हम ही नहीं हैं और भी लोग किसी न किसी परेशानी को झेल रहे हैं। कोविड-19 से पहले भी इंसानी जीवन बहुत सी मनोवैज्ञानिक परेशानियों को झेल रहा था पर इस महामारी ने उसको और गंभीर बना दिया है। 


कोरोनावायरस को लेकर डर और अनिश्चितता मानसिक सेहत को और ज्यादा खराब करने में इंधन का काम कर सकती है।


इस समय ज्यादातर लोग भावनात्मक रूप से खुद को कमजोर महसूस कर रहे हैं। जरूरी है कि मन की परेशानियों को लेकर भी सतर्क हो जाएं, तो मानसिक सेहत को लेकर एक बड़ी अड़चन दूर हो सकती है। यदि हम मन को लेकर सतर्क नहीं है और इससे जुड़ी परेशानियों को गंभीरता से नहीं लेते हैं तो इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि जटिल और जानलेवा शारीरिक बीमारियों को भी अधिक समय तक खुद से दूर नहीं रख पाएंगे।

इसलिए खुद के लिए हमारी जिम्मेदारी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी समाज व परिवार के लिए हमारी चिंता।


अपने लिए वह समय भी निकालें जब मन पूरी तरह से बाहरी दबावों से मुक्त हो और स्वत जिस कार्य करने से हमें आनंद की प्राप्ति हो, कुछ मिनटों के लिए ही सही हमें वह कार्य अवश्य करना चाहिए।

मन पर कोई बोझ हो तो उसे किसी मित्र या हितैषी से बांटे... कहा जाता है कि "बांटने से दुख खत्म" होता है। मन की सेहत को लेकर जो पहल करते हैं या इलाज कराना चाहते हैं उनका खुलकर साथ दें।

किसी भी भ्रामक समाचार या झूठी बातों में पढ़कर खुद पर कोई दबाव न बनाएं। शांत मन से सही तथ्य जानने का प्रयास करें। कई बार हम गलत बातों के भ्रम में पड़कर अपना सुख चैन गवा बैठते हैं, जो कि बिल्कुल भी उचित नहीं होता है।


यह समझ ले कि कोई मंथरा आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती है बस जरूरी है कि हम अपने मन को कैकेई ना बनने दें, कहने का तात्पर्य है कि दूसरों द्वारा गलत बातें के बहकावे में आने से सदैव बचने का प्रयास करना चाहिए।


हमारे मन में चार प्रकार के विचार होते हैं ‌

१.. शुद्ध, शक्तिशाली, सकारात्मक व निस्वार्थ

२.. अहम व क्रोध से भरे नकारात्मक विचार जो घृणा, द्वेष, भय, अस्वीकृति व निंदा को जन्म देते हैं।

३.. कुछ अनिवार्य विचार होते हैं जो हमारे काम से संबंध रखते हैं। यह तटस्थ विचार हैं।

४.. चौथी प्रकार के वो विचार कहलाते हैं जो अतीत या भविष्य से जुड़े होते हैं। इन पर समय या ऊर्जा नष्ट करना व्यर्थ है।

जब हम आनंद में हो कर कर्म करते हैं, तो मन को कोई कष्ट मालूम नहीं पड़ता। हजारों कर्म हाथों से होते रहने पर भी मन निर्मल और शांत रहता है। इसलिए हमें अपने नजरिए में लचीलापन लाना जरूरी है। यह मानकर चलना चाहिए कि बिना कठिनाइयों के जीवन का आनंद नहीं पाया जा सकता है। हमेशा मन को खुश रखे और खुशियां ही बांटते चलें।

हमारे पास *जो है* *जैसा है* और *जितना है* इसी सूत्र को अपनाकर अपने काम में पूरी तरह से डूब जाएं। यह बिल्कुल सत्य बात है कि सिर्फ पैसों से खुशियां नहीं मिल सकती हैं।


किसी भी तरह का डर अपने मन से निकाल दें। ताकि जीवन की एकरसता खत्म हो सके। निडर होकर अपना कार्य करें, जिससे हम अपना १०० प्रतिशत दे सकते हैं। हमारा यह समर्पण मन को संतुष्टि देने के साथ खुशियों से भर सकता है।


मेरी राय में आज से ही यह खूबसूरत पहल करें क्योंकि यह संसार परिवर्तनशील है। यहां परिस्थितियां बनती और बिगड़ती रहती हैं। यह जीवन परमात्मा की अमूल्य देन है और इस अमूल्य देन को व्यर्थ में गंवाने की आवश्यकता नहीं है।


आजकल नवरात्रि पर्व का शुभ अवसर है और रामलीला भी हो रही है, तो हमें अपने देवी-देवताओं से यह शिक्षा लेनी चाहिए कि किस तरह उन्होंने भी जब मानव रूप में धरती पर जन्म लिया तो वह सारे सुख दुख भोगे, जो मानव को अपने जीवन में भोगना पड़ता है। साथ  ही उन्होंने हमें यह शिक्षा भी दी कि अगर हमारे मन में निश्चल प्रेम की धारा बह रही है तो कोई नकारात्मकता हमारे मन को कमजोर नहीं कर सकती है।


यदि कभी-कभी मन कमजोर पड़ता है और राह भटकता भी है, तो याद रखें कि मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। और सबसे बड़ी बात है कि *मन ही मन का सच्चा मीत*।



देश के हर जिला मुख्यालय पर सूचना भवन संकुल का निर्माण कराये, भारत सरकार :- शास्त्री

 


ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री जी ने भारत सरकार से मांग करते हुए कहा है कि जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश के राजधानी सहित कुछ जिलों में सूचना भवन संकुल का निर्माण कराया जा रहा है उसी प्रकार से देश के हर जनपद मुख्यालयो पर सूचना भवन संकुल का निर्माण कराया जाए।


साथ ही श्री शास्त्री जी ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से भी उपरोक्त मांग को दोहराते हुए कहा है कि आपकी सरकार द्वारा जिस प्रकार से पत्रकारों के सम्मान में राजधानी, गोरखपुर एवं शाहजहांपुर मे सूचना भवन संकुल का निर्माण कराया जा रहा है, जो देश मे अलग पहचान होगी उसी प्रकार से मीडिया कर्मियों के सम्मान मे अपने प्रदेश के समस्त जिलों में सूचना भवन संकुल का निर्माण कराए, जिससे जिलों में भेदभाव न रह सके।


श्री शास्त्री जी ने कहा कि जहां एक ओर देशभर में सूचना भवन संकुल का निर्माण कराया जाना नितांत आवश्यक है वहीं दूसरी ओर पत्रकारों मे एकरूपता व उनके मान-सम्मान का ख्याल होगा वही तीसरी ओर भारत सरकार के एक देश एक कानून के सूत्र  को बल मिलेगा।


शास्त्री जी ने बताया कि ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन पिछली सरकारों से पत्रकारों के सुविधा हेतु प्रेस क्लब संकुल बनाए जाने की मांग करता चला आ रहा है, जिससे पत्रकार आधुनिक संचार माध्यमों से परिपूर्ण एवं सुविधाजनक ढंग से अपने समाचारों को संप्रेषित कर सके।


दशकों से एसोसिएशन द्वारा प्रेस क्लब संकुल बनाने की मांग को पुनः दोहराते हुए भारत सरकार तत्काल पत्रकारों की समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए, देश के हर जनपद मुख्यालयों पर सूचना भवन संकुल का निर्माण कराएं।

"प्लास्टिक के प्रति दीवानापन"

दीवाने हुए पागल... सही तो है यह दीवानापन धीरे-धीरे पागलों की तरह ही बढ़ता जा रहा है। एक तरफ तो कहा जाता है कि प्लास्टिक मुक्त धरती और प्लास्टिक मुक्त देश बनाना है और वहीं दूसरी तरफ जिसको देखो वह  अनायास ही, या जानबूझकर  प्लास्टिक के प्रति अपनी आसक्ति बढ़ाता ही जा रहा है।
जहां यह बात सही है कि प्लास्टिक धरती के लिए बहुत नुकसानदायक है। तो फिर निरंतर इसका उत्पादन क्यों होता जा रहा है???? इतना बड़ा प्लास्टिक उद्योग फल फूल रहा है। क्या उस वक्त किसी को यह पता नहीं था कि प्लास्टिक का कचरा निस्तारण करना कितना कठिन कार्य है?

चलिए अब तो सब यह भली-भांति जानते हैं की प्लास्टिक कितना नुकसानदायक है, फिर क्यों आंखें मूंदे बैठे हैं। अगर पहले गलती हो गई है तो उसको सुधारा नहीं जा सकता क्या? 

सब कुछ सजावटी व सुंदर लगाने के चक्कर में हम इस प्लास्टिक के चक्रव्यूह में फंस कर रह गए हैं। हर तरफ हर चीज में किसी न किसी रूप में प्लास्टिक दिख ही जाता है।

हमारे बचपन को वास्तव में सुनहरा काल कहना चाहिए 70 - 80 के दशक तक प्लास्टिक की इतनी निर्भरता नहीं थी। राशन वगैरह सब कागज के पैकेट में या झोले में या गत्ते की पेटी में करके आते थे। राशन घर में साफ किया जाता था, क्योंकि खुला ही बिकता था और सब लोग आराम से करते भी थे।

लेकिन अब तो हर चीज प्लास्टिक में पैक मिलेगी और यदि खुली मिल भी जाए तो प्लास्टिक की पन्नी में डालकर ही मिलेगी।

सरकार की तरफ से कई बार प्लास्टिक बंद अभियान चलाए गए। छोटे, बड़े दुकानदारों, सब्जी वालों, फल वालों पर चालान भी हुए लेकिन कुछ ही दिनों में सब टाॅय टाॅय फिसस्

इसके पीछे ढुलमुल सरकारी नीति के साथ, आम जनता का कमजोर मनोबल भी है। अगर कोई चीज धरती के लिए इतनी नुकसानदायक है, तो उसको कम से कम उपयोग करने का प्रयास करना चाहिए।

कम से कम सब्जी, फल, राशन वगैरा तो झोले में ला सकते हैं। अगर दरवाजे पर ही सब्जी ले रहे हैं तो बांस की डलिया प्रयोग में ला सकते हैं। एक बार इस्तेमाल करके फेंकने वाली वस्तुओं पर रोक लगानी चाहिए।

होटलों और रेस्टोरेंट आदि में भी खाना पैक करने के लिए प्लास्टिक के डिब्बों पर रोक लगनी चाहिए, क्योंकि वह डिब्बे फिर कूड़े में ही जाते हैं। कोशिश तो करनी चाहिए कि अगर खाना पैक करा कर घर ले जाना है तो घर से ही अपना बर्तन लेकर जाएं और होटल वालों को भी इसे प्रोत्साहित करना चाहिए। प्रयास करने से सब कुछ संभव हो सकता है। बस जरूरत सही दिशा में सही कदम बढ़ाने की है। और वह दिन आज से ही शुरू हो सकता है।

हम सभी को इस बात पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए कि हम व्यर्थ में ज्यादा प्लास्टिक का कचरा ना पैदा करें। *यूज एंड थ्रो* की आदत को कम करने का प्रयास करना चाहिए। हमारा छोटा सा प्रयास ही बड़े बड़े बदलाव ला सकता है।

प्लास्टिक कितना नुकसानदायक है, यह जानते तो सभी लोग हैं। लेकिन इस्तेमाल करते समय भूल जाते हैं। 

तो कृपया आप अपनी भूल सुधारें और प्लास्टिक के प्रति अपनी निर्भरता को धीरे धीरे कम करते जाएं।
आप लोगों को शायद थोड़ा अजीब लगे लेकिन मैं खुद दरवाजे पर सब्जी बांस की डलिया में ही लेती हूं और अपनी कॉलोनी के सभी लोगों से यह आग्रह भी करती हूं कि वह भी ऐसा ही करें और ऐसा पिछले कई सालों से कर रही हूं और साथ ही जो नमकीन वगैरा के पैकेट आते हैं उन्हें भी खाली होने के बाद कूड़े आदि के लिए इस्तेमाल करती हूं। बेवजह पॉलिथीन में सामान लेने से हमेशा बचती हूं। यह सब प्रयास करके मुझे बहुत खुशी भी मिलती है।

तो आइए हम सब मिलकर प्लास्टिक का कचरा कम करने का सार्थक प्रयास करते हैं *मुझमें है महात्मा*का ध्यान करते हुए गांधीजी को सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए स्वच्छता को  लगातार अपनाते जाएं। अपने लक्ष्य को पाने के लिए निरंतर संघर्ष और प्रयास करते जाना चाहिए तभी तो हम कह सकते हैं कि *मुझमें है महात्मा*
पर्यावरण की शुद्धता के लिए बापू के विचारों को अपनाते हुए प्रकृति के साथ मेल बिठाकर चलते हुए ही सृष्टि को भारी विनाश से हम बचा सकते हैं।

हमें प्रकृति के साथ मधुर संबंध बनाना होगा। प्राकृतिक चीजों के प्रति दयालु बनना होगा और साथ ही अपनी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता का बार-बार स्मरण करना चाहिए कि हमारे देश में हजारों वर्षों से पेड़, पौधों और प्रकृति के प्रति बहुत उदार भावना थी। और  उन्हें सजीव मानकर उनका पूजन और संरक्षण किया जाता है। और अपनी इस परंपरा को हमें निरंतर आगे बढ़ाने का पूरी दृढ़ता से प्रयास करना चाहिए।
सब की भलाई में ही विश्व की भलाई निहित है, और पूरे विश्व की भलाई प्रकृति की भलाई में निहित है। हम 
सबका इको फ्रेंडली बनना बहुत जरूरी है तभी वास्तव में हम कह सकते हैं कि *मुझमें है महात्मा*

डॉ कुसुम पांडेय
वरिष्ठ समाजसेवी, अधिवक्ता एवं लेखिका

बने जर्नलिस्ट रजिस्टर, मिले पत्रकारों को भी पेंशन :- शास्त्री

 

ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री जी ने नेशनल जर्नलिस्ट रजिस्टर बनाने की मांग की है जिससे कानूनी आधार पर पत्रकार की परिभाषा तय हो सकेगा,  वर्तमान में पत्रकार मात्र नाम का चौथा स्तम्भ है ऐसे में पत्रकार की कोई निर्धारित परिभाषा नहीं है उन्होंने कहा कि नेशनल जर्नलिस्ट रजिस्टर बनने से सभी पत्रकारों का नियम कानून के तहत रिकॉर्ड बन जायेगा, साथ ही उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बने कानून भी सख्ती से लागू हो जिससे देश के समस्त मीडियाकर्मी वास्तविक रूप से न्यायपूर्ण बिना किसी दबाव के अपना कार्य कर सके।


उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री बाजपेई एवं पूर्व उपराष्ट्रपति शेखावत जी का हवाला देते हुए बताया कि मीडिया जनता एवं सरकार के आंख व मुंह के रूप में रहते हैं वे जनता की समस्या सरकार तक एवं सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को जनता तक पहुंचाते है।


शास्त्री जी ने साथ ही यह भी कहा कि नेशनल जर्नलिस्ट रजिस्टर के साथ पत्रकारों के लिए पेंशन भी जरूरी है जिसका घोषणा किया जाना चाहिए। देश के कुछ राज्य सरकारे पत्रकारों को पेंशन दे रही हैं  लेकिन सभी प्रदेशों में अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया, जो बहुत ही खेद का विषय है, एसोसिएशन दशको से जरिए रजिस्ट्री, ईमेल, विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मो, स्वतः एवं जनप्रतिनिधियों व प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से देश व प्रदेश की सरकारों को अवगत कराता चला आ रहा है।  पत्रकारों को भी तीनों स्तंभों की तरह पेंशन आदि की सुविधा दी जानी चाहिए और इसके अलावा उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से डॉक्टरों, अधिवक्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बलों आदि के लिए पूरे देश में एक नियम-कानून है उसी प्रकार से पत्रकारों का भी एक नियम-कानून होना चाहिए। देश का हर पत्रकार राष्ट्रहित सर्वोपरि रखते हुए अपने दायित्वों का पूरा का पूरा निर्वहन करता है। उसके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव होना बहुत ही दुखद है। देश के सभी पत्रकारों को भी स्वास्थ्य बीमा कवर के तहत शामिल किया जाना चाहिए।


श्री शास्त्री जी ने प्रधानमंत्री जी से नेशनल जर्नलिस्ट रजिस्टर एवं पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने व पेंशन, बीमा आदि मांगों पर विचार करने के लिए अनुरोध किया गया है।

पत्रकारों को आंशिक लाभ देने के लिए मुख्यमंत्री जी का आभार :- शास्त्री


[*आकस्मिक सहायता व स्वास्थ्य बीमा राशि दोगुनी करने एवं इस योजना का लाभ सभी पत्रकारों को दिये जाने की सरकार से मांग*]



ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के  अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री ने पत्रकारों के लिए कोविड-19 से आकस्मिक निधन पर दी जाने वाली 10 लाख रुपये एवं हेल्थ कवर के लिए पांच लाख रुपये की सहायता राशि के आंशिक एलान पर मुख्यमंत्री जी का आभार जताते हुए, राशि को दोगुनी करने एवं इस योजना का लाभ समस्त पत्रकारों को देने की मांग की है।



शास्त्री जी ने कहा कि प्रदेश के पत्रकारों के लिए सबसे ज्यादा जरुरी पेंशन है जिसका भी घोषणा किया जाना चाहिए। देश के ज्यादातर राज्य सरकारे पत्रकारों को पेंशन दे रही हैं  लेकिन उत्तर प्रदेश में अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया, जो बहुत ही खेद का विषय है, एसोसिएशन दशको से जरिए रजिस्ट्री, ईमेल, विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मो, स्वतः एवं जनप्रतिनिधियों व प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से देश व प्रदेश की सरकारों को अवगत कराता चला आ रहा है। 



साथ ही शास्त्री जी ने आकस्मिक मृत्यु की दशा में सहायता राशि व स्वास्थ्य बीमा की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान परिदृश्य को देखते इस राशि को दोगुना किए जाने की जरुरत है  साथ ही मान्यता प्राप्त के अलावा सभी पत्रकारो डेस्क कर्मियों व इस विधा के सभी कर्मचारियों को इस योजना का लाभ दिया जाए एवं उनके आकस्मिक निधन पर कम से कम 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उनके परिजनों को दी जानी चाहिए।



श्री शास्त्री जी ने मांग को दोहराते हुए कहा कि आज की परिस्थिति में चिकित्सा पर होने वाले भारी भरकम खर्च को देखते हुए प्रदेश सरकार को पांच लाख रुपये की जगह कम से कम दस लाख रुपये की घोषणा किये जाने, आर्थिक सहायता राशि बढ़ाने, स्वास्थ्य बीमा कवर की राशि बढ़ाने एवं इस सुविधा का लाभ सभी पत्रकारों को देने व पेंशन आदि मांगों पर विचार करने के लिए श्री शास्त्री जी द्वारा मुख्यमंत्री जी से अनुरोध किया गया है।







आँल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन ने पत्रकारों की समस्याओं के समाधान हेतु लिखा मा. मुख्यमंत्री (उ.प्र.) जी को पत्र।


सेवा में,

          श्री योगी आदित्यनाथ जी

          मा. मुख्यमंत्री, उ.प्र., लखनऊ


विषय:- पत्रकारों के विभिन्न समस्याओं के निराकरण के संबंध में निम्न निवेदन।


आदरणीय महोदय,

                           सअनुरोध के साथ आपसे प्रदेश के पत्रकारों के समस्याओं एवं उनके अधिकारों के लिए आपसे आग्रह करते हुए यह कहना चाहता हूँ कि अन्य प्रदेशों की तरह अपने प्रदेश में भी सभी पत्रकारों को पेंशन, बीमा, आवास एवं प्रदेश के सभी पत्रकारों व उनके परिजनों को प्रदेश के सभी अस्पतालों में मुफ्त चिकित्सा सुविधा आदि योजना का लाभ शीघ्राति-शीघ्र दिया जाना चाहिए ।


प्रदेश में ग्रामीण, शहरी, महानगर, टाउन एरिया आदि की विसंगतियों को दूर करते हुए प्रदेश के समस्त पत्रकारों की सुविधा एक किया जाए।


प्रदेश के कुछ जिलों में जिस तरह से पत्रकारों को आवास एवं भूखंड की सुविधा उपलब्ध कराया गया है उसी प्रकार से जिस जिलों में इसकी व्यवस्था नहीं की गई है वहां भी व्यवस्था दिया जाए और जहां कमी हो उसकी भी पूर्ति किया जाए।


मीडिया कर्मियों की सुरक्षा के लिए जल्द ही (जर्नलिस्ट प्रोटेक्शन एक्ट) "पत्रकार सुरक्षा कानून" एवं स्टेट जर्नलिस्ट रजिस्टर व मीडिया जगत के उत्थान व हितों के लिए पत्रकार कल्याण बोर्ड का गठन कराया जाए।


प्रदेश में जिस तरह से  डॉक्टर, वकील, कर्मचारी, अधिकारी पुलिसकर्मी सफाई कर्मी आदि लोगों के लिए नियम कानून है उसी तरह से पत्रकारों के लिए भी  स्टेट जर्नलिस्ट रजिस्टर होना चाहिए।


एसोसिएशन के माध्यम से पत्रकारों के उपरोक्त समस्याओं के निराकरण के संबंध में विगत कई वर्षों से समय-समय पर जरिए रजिस्ट्री, ईमेल एवं अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व स्वयं के माध्यम से आपके यहां एवं उचित कार्यालयों को अवगत कराया जाता आ रहा है, जिसमें अभी तक कोई संतोषजनक परिणाम नहीं मिल पाया है।

जिसकी  छाया प्रतियां भी एसोसिएशन कार्यालय में अवलोकनार्थ हेतु उपलब्ध है एवं कुछछाया प्रतियां प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न है। 

      

मै पूर्ण आशा एवं विश्वास के साथ आशान्वित हूं कि प्रदेश के वर्तमान न्याय प्रिय एवं लोकप्रिय मा.मुख्यमंत्री जी द्वारा प्रदेश के समस्त पत्रकारोंक की उपरोक्त समस्याओं के समाधान हेतु बिना देर किए शीघ्राति शीघ्र निर्णय करेंगे।


सधन्यवाद!


                                                         भवदीय

                                               आचार्य श्रीकांत शास्त्री 

                                                     स्वतंत्र पत्रकार 

                  अध्यक्ष:- आल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन

पत्रकारों को कवरेज के दौरान गिरफ्तार करना चौथे स्तंभ को दबाने की कोशिश:- शास्त्री


(*महाराष्ट्र मे अपना धर्म निभा रहे दो पत्रकारों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने की कार्यवाही का ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन परिवार द्वारा किया जा रहा है पुरजोर विरोध*)



ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री जी ने कहा है कि कंगना रनौत एवं संजय राऊत के मामलों में कवरेज कर रहे दो पत्रकारों को महाराष्ट्र सरकार के इशारे पर पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने की घटना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने एवं खुलेआम हत्या है, महाराष्ट्र सरकार द्वारा इस प्रकार से पत्रकारों का किए जा रहे उत्पीड़न की जितनी भी घोर निंदा की जाए वह कम है।


साथ ही शास्त्री जी ने यह भी कहा कि आघाडी सरकार जिस प्रकार से सच्चाई उजागर करने वाले पत्रकारों का उत्पीड़न करवा रही है और उन्हें गिरफ्तार करवा रही है वह एक तानाशाही रवैया है।


वहां की सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान भी गैरकानूनी ढंग से पत्रकारिता का धर्म निभा रहे पत्रकारों के खिलाफ अनुचित कार्यवाही किया गया था जिस पर PCI ने स्वत संज्ञान लेकर कड़ी फटकार लगाई थी एवं ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा भी महाराष्ट्र सरकार के पत्रकार विरोधी नीतियों का खुला विरोध किया गया था।


श्री शास्त्री जी द्वारा स्पष्ट रूप से महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा गया है की यदि तत्काल प्रभाव से पत्रकारों को रिहा नहीं किया गया एवं पूर्व में फर्जी ढंग से पत्रकारों पर लिखे गए मुकदमों को वापस नहीं लिया गया तो ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन परिवार द्वारा महामहिम राष्ट्रपति एवं मा. प्रधानमंत्री व वहां के महामहिम राज्यपाल एवं मा. अध्यक्ष भारतीय प्रेस परिषद को रजिस्ट्री पत्र एवं ज्ञापन के माध्यम से उचित कार्यवाही की मांग करते हुए पूरे देश में महाराष्ट्र सरकार का विरोध किया जाएगा।


पिछली सरकारों द्वारा पास भवन को वर्तमान में बीएमसी द्वारा की जा रही कार्यवाही पक्षपात पूर्ण एवं कानून विरुद्ध व देश की जनता के आंख में धूल झोंकने जैसा है। इसी प्रकार से सुशांत सिंह केस मे की जा रही लीपापोती महाराज सरकार की पोल खोलकर रख दी है। 

श्री शास्त्री जी द्वारा पुनः दोहराते हुए कहा गया है कि उपरोक्त बातो पर ध्यान नहीं दिया गया तो ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन परिवार द्वारा संविधान की रक्षा करने व करवाने वाले चौथे स्तंभ के सिपाहियों/कलमकारो/मनिषियो/ राष्ट्र प्रेमियों के समर्थन में देशभर में धरना प्रदर्शन कर महाराष्ट्र सरकार के तुगलकी नीति का खुला विरोध किया जाएगा।


✍️A.I.P.R.W.A.

सहयोगी दलों के सहयोग से एनडीए तीसरी बार भी अपनी नैया पार लगाने की फिराक मे।

  आचार्य श्रीकान्त शास्त्री, वरिष्ठ पत्रकार  देश में आम चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां बड़ने लगी है और हर पार्टिया ‌अपनी ...