*समय का चक्र*


वक्त भी अजीब चीज है

वक्त के साथ ढल गये 

हम तो घर में रुक गए

तुम भी घर में ही रुक जाओ


वक्त है अजीबोगरीब

तन्हा रहना है जरूरी

पर अपनों की सुरक्षा के लिए

ध्यान भी देना पड़ता है

शादी और शहनाई से भी

अब तो दूर ही रहना पड़ता है


आते हैं निमंत्रण तो अवश्य करो स्वीकार

पर जाना जरूरी नहीं है इसका भी करो विचार


यह कैसी आपदा आई है

नहीं... यह तो हमारी ही लापरवाही है


साल बीत गया पर हम सोते ही रहे

मास्क को मजाक ही समझते रहे


जो लोग नियमों का पालन कर रहे थे

बहुतेरे तो बस अपनी नजरों से उन्हें

घूर ही रहे थे

कैसा विचित्र भाव था

पर अब लगता है

वही तो सही था


हर बार जनता ने

खुद नासमझी दिखाई है

अपनी गलती दूसरे के सिर पर डालकर


अपनी जिम्मेदारी से फुर्सत पाई है


पैसे और अमीर बनने की इच्छा ही ने

सारी फजीहत मचाई है....

दवा चोरी, ऑक्सीजन चोरी

सफेदपोशों की हर तरह की चोरी जारी है


उनके लिए तो महामारी

कमाई का जरिया बन कर आई है


हाहाकार मचा कर मीडिया ने भी चारो ओर

भ्रम और डर फैलाया है


प्रेस ने भी कहां समझदारी भरा फर्ज निभाया है

बस जीवन बिताये जा रहे हैं कमियां निकालने में


अच्छाई देखने वाली नजरों पर 

तो धूल से सना पर्दा चढ़ाया है


हर कोई बस आपदा को असर बना रहा है


झूठ से सना हुआ झूठा सच परोसा जा रहा है


बस जिम्मेदार लोगों को कोसा जा रहा है


आंकड़ों को भी झूठा साबित करने का आरोप लगाया जा रहा है


प्रेस और मीडिया भी अपने में मगन है


सिर्फ दिखावे के काम में संलग्न है


हाय हाय यही तो असली महामारी है


जिसमें गलती किसी और की 

और आरोप किसी और पर जारी है


यह कैसी महामारी है यह कैसी महामारी है


आरोप-प्रत्यारोपो का खेल

हर तरफ जारी है

हर तरफ जारी है


समय का चक्र चिंतनीय दिख रहा है


व्यक्ति अपनी ही कमियों से

रसातल में गिर रहा है।


वरिष्ठ समाजसेवी, अधिवक्ता एवं लेखिका

डॉ कुसुम पांडेय

समस्त पत्रकारों को बुनियादी सुविधाओ के संबंध में मा. मुख्यमंत्री जी को पत्र!

 सेवा मे,  

          श्री योगी आदित्यनाथ जी

          मा. मुख्यमंत्री महोदय जी

          उत्तर प्रदेश, लखनऊ


विषय:- समस्त पत्रकारों को बुनियादी सुविधाओ के संबंध में।


आदरणीय महोदय,




सादर अनुरोध के साथ अवगत कराना है कि स्वतन्त्र भारत का चौथा स्तम्भ पत्रकार को माना गया है लेकिन किसी भाग में दिखाई नहीं देता है। जहाँ हर विधा के कार्य करने वाले लोगों के विभागों में बाकायदा उनकी गणना एवं पंजीकरण है इसका लाभ उनको यह होता है कि विशेष परिस्थितियों में सरकार द्वारा प्रदत्त सुविधाएं, उन्हें मिल जाती है वहीं पत्रकारों के मामलों में उनके पहचान का संकट खड़ा हो जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर "प्रेस काउसिंल ऑफ इंडिया" भी है लेकिन वहीं पत्रकारों का पंजीकरण नहीं होता है। जिससे पत्रकारों का आज तक न कोई गणना, न ही पंजीयन हो पाया है और ना ही पत्रकारों को उपरोक्त की तरह कोई सुविधा मिल पाया है जिससे पत्रकारों के सामने उनके पहचान का संकट खडा हो गया है। 


उक्त के सम्बन्ध में मा. महोदय जी आपसे अनुरोध है कि चौथे स्तम्भ को बचाने के लिए उपरोक्त की तरह पत्रकारों का पंजीकरण एवं उनके सुविधाओं के लिए व्यवस्था किया जाना न्याय पूर्ण होगा। जहां जो जानकारी विभाग नहीं दे पाता है वहाँ वह जानकारी पत्रकार समय-समय पर देते रहते है एवं साथ ही साथ समाज के हर प्रकार के खबरों को कवरेज करने व भ्रष्टाचार उजागर करने में पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर रातों-दिनों कार्य करते रहते है व कानून व्यवस्था को स्थापित करवाने एवं सरकार के द्वारा चलाए जा रहे जनहित कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य भी बड़े ही ईमानदारी एवं निष्ठा के साथ सफलतापूर्वक करते रहते हैं। वहीं सरकारों के द्वारा पत्रकारों को सुविधा न के बराबर दी जाती है, जो पत्रकारों के साथ अन्याय है।


अत: माननीय महोदय जी आपसे निवेदन करते हुए यह मांग करता हूँ कि जिस प्रकार से जनप्रतिनिधियों के द्वारा समाज में कार्य करने पर उन्हें सुविधाएं प्रदान की जाती है उसी प्रकार से पत्रकार भी जोखिम के साथ समाज में कार्य करते हैं। उक्त की भाँति पत्रकारों को भी मानदेय, टेलीफोन, आवास, दवा, सुरक्षा, मुफ्त यात्रा, बीमा, एवं उनके आश्रितों को सुविधा व पंजीकरण कराने के लिए आप सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए समस्त पत्रकारों को उक्त सुविधाएं प्रदान करने की महान कृपा करें। इससे पत्रकार समाज बिना किसी संकट के अपने दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा से अपना कार्य करने में अहम भूमिका निभा सकेंगे।

बार काउंसिल के तर्ज पर प्रेस काउंसिल मे भी चुनाव करवाये जाने के संबंध में माननीय प्रधानमंत्री जी को पत्र!


 सेवा में,

          श्री नरेंद्र मोदी जी 

          मा. प्रधानमंत्री 

         भारत सरकार, नई दिल्ली



विषय: - बार काउंसिल के तर्ज पर प्रेस काउंसिल मे भी चुनाव करवाये जाने के संबंध में।


आदरणीय महोदय, 


सादर अनुरोध के साथ अवगत कराना है कि जिस प्रकार से आपकी लोकप्रिय सरकार द्वारा देश मे विभिन्न स्वर्णिम नियम-कानून के तहत जनहितार्थ कार्य क्रांतिकारी ढंग से किया जा रहा है, उसी प्रकार से देश के समस्त पत्रकारों के सुविधा, सुरक्षा आदि के लिए  प्रेस काउंसिल में भी चुनाव करवाने के लिए निर्देश दे, जिससे पत्रकारों का भी कानूनी आधार पर परिभाषा तय हो सके, जो अभी तक मात्र नाम का चौथा स्तम्भ है जिसको अन्य की भाँति महोदय जी सहानुभूति पूर्वक कानूनी ढंग से मूर्त रूप देने की महान कृपा करें। 




मा. महोदय आपकी जनप्रिय सरकार देश के विभिन्न क्षेत्रों में अमूलचूल परिवर्तन के साथ कार्य कर रही है जिससे पूरा देश लाभान्वित हो रहा है उसी प्रकार से बार काउंसिल की तरह प्रेस काउंसिल को भी संसाधन सहित अधिकार जारी करने एवं उनके सुरक्षा के लिए बने कानून को भी सख्ती से लागू करवाने व सभी पत्रकारों का नियम कानून के तहत रिकॉर्ड बनवाने का आदेश दे जिससे देश के समस्त मीडियाकर्मी वास्तविक रूप से न्यायपूर्ण बिना किसी दबाव के अपना कार्य कर सके। 


महोदय जी मीडिया जनता एवं सरकार के आंख व मुंह के रूप में कार्य करती हैं और जनता की समस्या सरकार तक एवं सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को जनता तक पहुंचाती है जिसकी सराहना भी आप एवं आप की सरकार द्वारा बराबर किया जाता रहता है। 


अतः मा. महोदय जी आपसे विनम्र निवेदन है कि जिस प्रकार से देश में बार काउंसिल द्वारा देश, प्रदेश, जिला व तहसील स्तर पर बाकायदे चुनाव कराया जाता हैं, उसी प्रकार से पत्रकारों के लिए प्रेस काउंसिल को भी चुनाव कराए जाने की व्यवस्था एवं अधिकार देने व तीनों स्तंभों की तरह चौथे स्तंभ को भी सुविधा के लिए आदेश देने की कृपा करे।

A.I.P.R.W.A. ने लिखा मा. प्रधानमंत्री जी को पत्र!

 सेवा मे, 

श्री नरेंद्र मोदी जी

मा. प्रधानमंत्री महोदय

भारत सरकार, नई दिल्ली



विषय:- नेशनल जर्नलिस्ट रजिस्टर बनाने एवं देश के समस्त पत्रकारों को सुविधा व पेंशन के संबंध में।


आदरणीय महोदय,


सादर अनुरोध के साथ अवगत कराना है कि, जिस प्रकार से आपकी लोकप्रिय सरकार द्वारा देश मे विभिन्न स्वर्णिम नियम-कानून के तहत जनहितार्थ कार्य क्रांतिकारी ढंग से किया जा रहा है, उसी प्रकार से देश के समस्त पत्रकारों के सुविधा, सुरक्षा आदि के लिए नेशनल जर्नलिस्ट रजिस्टर बनाने के लिए एवं पेंशन देने के लिए निर्देश दे, जिससे पत्रकारों का भी कानूनी आधार पर परिभाषा तय हो सके, जो अभी तक मात्र नाम का चौथा स्तम्भ है  महोदय जी जिसको भी अन्य की भाँति सहानुभूति पूर्वक कानूनी मूर्त रूप देने की महान कृपा करें।


मा. महोदय आपकी जनप्रिय सरकार देश के विभिन्न क्षेत्रों में अमूलचूल परिवर्तन के साथ कार्य कर रही है जिससे पूरा देश लाभान्वित हो रहा है उसी प्रकार से पत्रकारों के उपरोक्त नियम लागू करवाने एवं उनके सुरक्षा के लिए बने कानून को भी सख्ती से लागू करवाने व सभी पत्रकारों का नियम कानून के तहत रिकॉर्ड बनवाने का आदेश दे जिससे देश के समस्त मीडियाकर्मी वास्तविक रूप से न्यायपूर्ण बिना किसी दबाव के अपना कार्य कर सके।


महोदय जी मीडिया जनता एवं सरकार के आंख व मुंह के रूप में कार्य करती हैं, और जनता की समस्या सरकार तक एवं सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को जनता तक पहुंचाती है जिसकी सराहना भी आप एवं आप की सरकार द्वारा बराबर किया जाता रहता है।


महोदय जी देश के कुछ राज्य सरकारे अपने-अपने प्रदेश के पत्रकारों को पेंशन दे रही हैं  लेकिन देश सभी प्रदेशों में ऐसा नहीं है, जो एक देश एक नियम कानून के विरुद्ध है, आपसे निवेदन है कि आपके द्वारा जिस प्रकार से किसान पेंशन, वृद्धा पेंशन, वन रैंक वन पेंशन, अटल पेंशन आदि दिया जा रहा है, उसी प्रकार से देश के समस्त पत्रकारों को भी पेंशन देने की महति कृपा करें।


अतः मा. महोदय जी आपसे विनम्र निवेदन है कि जिस प्रकार से डॉक्टरों, अधिवक्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बलों, राजनीतिको, शिक्षकों आदि के लिए देश में एक नियम-कानून है उसी प्रकार से पत्रकारों के लिए भी एक नियम-कानून के तहत नेशनल जर्नलिस्ट रजिस्टर एवं तीनों स्तंभों की तरह चौथे स्तंभ को भी पेंशन आदि सुविधा के लिए आदेश देने की कृपा करें।




भवदीय

आचार्य श्रीकांत शास्त्री

पत्रकार की रहस्यमयी मृत्यु की उच्च स्तरीय जांच कराए सरकार:- शास्त्री


[*भदोही के वरिष्ठ पत्रकार की गूढ निधन का जल्द खुलासा करने के लिए एवं पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता के लिए सरकार से मांग*]




ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री जी ने जनपद भदोही, उ.प्र. के पत्रकार जयशंकर दुबे (संजय) की कथित सड़क हादसे से हुई शाजिशन हत्या कि जल्द से जल्द स्थानीय प्रशासन द्वारा जांच कर दूध का दूध पानी का पानी करने का निर्देश देने एवं पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता व परिवार के एक सदस्य को नौकरी की सरकार से मांग करते हुए कहा है कि जिस प्रकार से पत्रकार की कथित सड़क हादसे का रूप देकर निर्मम हत्या की गई है, वह बहुत ही दुखद है एवं चौथे स्तंभ को दबाने की कुत्सित प्रयास है, जो बर्दाश्त नही किया जाएगा।


साथ ही श्री शास्त्री जी ने यह भी कहा कि जिस प्रकार से देशभर में पत्रकारों की हो रही हत्या, उनके ऊपर हो रहे फर्जी मुकदमे एवं उनपर हो रहे उत्पीड़न व उनको बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है यह बहुत ही दुखद एवं चिंताजनक है। यह कृत्य सीधा-सीधा चौथे स्तंभ को दबाने की खड्यंत्रकारी साजिश है जो इस प्रकार के लोकतांत्रिक देश के लिए शुभ संकेत नहीं है।



*ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन* परिवार ने सरकार से मांग किया है कि पत्रकारों पर बढ़ते हमलों, हत्या, उत्पीड़न एवं फर्जी मुकदमो को रोकने के लिए *तत्काल पत्रकार सुरक्षा कानून, यूपी सहित पूरे देशभर में लागू किया जाए जिससे आए दिन हो रही पत्रकारों की षडयंत्रकारी हत्या एवं उनपर जानलेवा हमले एवं फर्जी ढंग से मुकदमे, धमकाने वाली आदि घटनाओं को रोका जा सके।


भदोही के वरिष्ठ पत्रकार जय शंकर दुबे (संजय) जी की साजिशन हत्या की घटना से देशभर के पत्रकारों में रोष व्याप्त है। जिसके संबंध में एसोसिएशन परिवार की ओर से उपरोक्त घटना के संबंध में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, अध्यक्ष P.C.I. सहित प्रदेश के आला अधिकारियों को जरिए ईमेल, सोशल मीडिया आदि प्लेटफॉर्मो के माध्यम से पत्र भेजकर *अपराधियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही करने के लिए एवं पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता व परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग* किया गया है।

National Girl Child Day (Poem)

 


बालिकाओं का अस्तित्व,

क्यों दिवस में समेटा  जाए

समाज में असमानता का,
भाव क्यों बढ़ाया जाए

बालक बालिकाओं को
समान समझकर, समाज का
विकास क्यों न किया जाए

वर्तमान की आवश्यकता को,
दिवसों में ना समेटा 
 जाए

अपनी परंपराओं को, ईमानदारी से निभाया जाए

हर दिन बालिका दिवस है,
उत्सव के रूप में मनाया जाए

राष्ट्र की बालिकाओं के चेहरे पर,
हमेशा बनी रहे मुस्कान

तभी सही मायने में,
राष्ट्रीय बालिका दिवस का
होता रहेगा सम्मान

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✍️डॉ. कुसुम पांडेय✍️

वरिष्ठ समाजसेवी, अधिवक्ता एवं लेखिका


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A.I.P.R.W.A. द्वारा उठाई गई मांग को P.C.I. ने लिया संज्ञान, मुख्य सचिव एवं DGP सहित आला अधिकारियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है...

 ✍️"ऑलइंडिया प्रेसरिपोर्टर वेलफेयरएसोसिएशन"🗞 द्वारा बलरामपुर उ.प्र. के पत्रकार "राकेश सिंह" की निर्मम हत्या के संबंध में उठाई गई मांग को P.C.I. ने स्वतः संज्ञान लेकर, मुख्य सचिव एवं DGP सहित आला अधिकारियों  को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है...


जल्द से जल्द सुनवाई....


(⚘"राष्ट्रहित सर्वोपरि"⚘

🇮🇳"राष्ट्र के साथ"🇮🇳

✍️"ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन"🗞)





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🌹🌹Jai Ho🌹🌹

पत्रकार के हत्यारों को फांसी एवं पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता की घोषणा करें सरकार:- शास्त्री


ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री जी ने बलरामपुर मे पत्रकार राकेश सिंह व साथी के हत्यारों के मुकदमा को फास्ट ट्रैक कोर्ट में करने एवं पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता व परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की सरकार से मांग करते हुए कहा है कि जिस प्रकार से पत्रकार व उसके साथी की जिंदा जलाकर निर्मम हत्या की गई है, वह बहुत ही दुखद है एवं चौथे स्तंभ को दबाने की कुत्सित प्रयास है, जो बर्दाश्त नही किया जाएगा।


साथ ही श्री शास्त्री जी ने यह भी कहा कि जिस प्रकार से देशभर में पत्रकारों की हो रही हत्या, उनके ऊपर हो रहे फर्जी मुकदमे एवं उनपर हो रहे उत्पीड़न व उनको बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है यह बहुत ही दुखद एवं चिंताजनक है। यह कृत्य सीधा-सीधा चौथे स्तंभ को दबाने की खड्यंत्रकारी साजिश है जो इस प्रकार के लोकतांत्रिक देश के लिए शुभ संकेत नहीं है।



*ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन* परिवार ने सरकार से मांग किया है कि पत्रकारों पर बढ़ते हमलों, हत्या, उत्पीड़न एवं फर्जी मुकदमो को रोकने के लिए तत्काल पत्रकार सुरक्षा कानून बनाया जाए और जिसे यूपी सहित पूरे देशभर में लागू किया जाए जिससे आए दिन हो रही पत्रकारों के प्रति जानलेवा हमले एवं हत्याओं को रोका जा सके।


बलरामपुर में हुई पत्रकार को जिंदा जलाए जाने की घटना से देशभर के पत्रकारों में रोष व्याप्त है। जिसके संबंध में एसोसिएशन परिवार की ओर से मा. प्रधानमंत्री, मा. मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के विभिन्न अधिकारियों को ईमेल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पत्र भेजकर हत्यारों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता व परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग किया गया है।

"आंवला नवमी का महत्व"


आइए हम सब मिलकर आंवला नवमी का पूजन करें।

कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी या अक्षय नवमी भी कहा जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से स्त्रियां सौभाग्य की प्राप्ति करती हैं। आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करने से सौभाग्य की प्राप्ति और रोगों का नाश होता है। इस दिन किया गया सभी कार्य पुन्य देने वाला होता है। कोई भी शुभ काम जैसे दान, पूजा, भक्ति, सेवा जो भी इस दिन किया जाता है... उसका फल कई कई जन्मों तक प्राप्त होता है।

पद्म पुराण के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव जी का आंवले के पेड़ पर निवास होता है।
मां लक्ष्मी ने भी आंवले के वृक्ष का पूजन किया था। 

आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु का अति प्रिय है। आंवले के वृक्ष के स्मरण और पूजन से गोदान का फल मिलता है।

इस बार 23 नवंबर को आंवला नवमी का पर्व है। इस दिन सर्वप्रथम मां लक्ष्मी की आराधना की जाती है।

एक धार्मिक मान्यता यह भी है कि आंवला नवमी से लेकर प्रबोधिनी एकादशी तक पूजन करना चाहिए और प्रबोधिन एकादशी के दिन से आंवले का सेवन करना चाहिए।जिस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा हो उस दिन उसमें से आंवले के फल नहीं तोड़ने चाहिए। 

यथा उपलब्ध पूजन सामग्री से यदि संभव हो तो आंवले के पेड़ की पूजा करनी चाहिए और साथ ही इसकी  सात परिक्रमा भी करनी चाहिए।

आंवले में बहुत सारे औषधीय गुण भी हैं। आंवले में आयरन और विटामिन सी भरपूर होता है। आंवले का जूस रोज पीने से पाचन शक्ति सही रहती है। त्वचा में चमक आती है। आंखों और बालों के एवं त्वचा संबंधी रोगों के लिए आंवला अत्यंत लाभकारी होता है।

हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति इतनी विकसित और पर्यावरण प्रेमी रही है कि जब भी हम कोई व्रत-त्योहार या पर्व मनाते हैं तो उसके पीछे जितना धार्मिक  महत्व होता है उतना ही महत्व वैज्ञानिक और प्राकृतिक भी होता है। हमारे देश में हर ॠतु, फसल, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सभी को प्रकृति मानकर पूजा जाता है।

अभी हाल ही में सूर्य षष्ठी का व्रत हुआ जो पूर्णता प्राकृतिक पूजा का ही स्वरूप है।

सही मायने में संसार की रचना भी पुरुष और प्रकृति के विशिष्ट संबंध को परिलक्षित करती है। आंवला प्राकृतिक रूप से औषधीय गुणों का भंडार है। इसीलिए देवी देवताओं ने इसके संरक्षण के लिए इस में वास करने का निश्चय किया। जिससे आंवले के वृक्ष को सुरक्षित रखा जा सके। 

आंवला औषधीय गुणों का प्रचुर स्रोत है, यही कारण है कि च्यवन ऋषि ने सबसे पहले आंवले से चवनप्राश बनाया था, जो जीवनदायिनी औषधि के रूप में होता है। च्यवनप्राश में वृद्ध को भी नवयुवक बनाने की शक्ति होती है, ऐसी मान्यता है।

तो अभी जबकि कोविड-19 का समय चल रहा है। प्राकृतिक चीजों पर हमारी निर्भरता बढ़ गई है, तो ऐसी स्थिति में हमें इन औषधीय गुणों वाले *आंवला देव की पूजा करना एवं उनका संरक्षण करना* अपने और अपनी आने वाली पीढ़ियों के हित में अत्यंत ही आवश्यक है। प्रकृति ने जो गुणों का खजाना हमको प्रदान किया है। अब बहुत ज़रूरी है कि हम सब मिलकर के उनका संरक्षण करें और अपनी आने वाली पीढ़ियों को उनके गुणों से अवगत कराएं तथा अपनी *प्राकृतिक संपदा के प्रति दयालु बने और जागरूक बने*।।

धन्यवाद
डॉ. कुसुम पांडेय
वरिष्ठ समाजसेवी अधिवक्ता एवं लेखिका

"मस्ती की पाठशाला" (Written By Dr. Kusum Pandey)

मस्ती की पाठशाला

वास्तव में क्या ऐसा संभव हो सकता है??? यह बात बार-बार मन पर एक प्रहार सा करती है। शिक्षा के नाम पर क्या मस्ती की पाठशाला चलाई जा सकती है??


आज के समय में तो यह विचार बहुत बेतुका सा लगता है क्योंकि अब तो बच्चा कुछ बोलना और समझना शुरू करें तभी से उसे ABCD रटाया जाने लगता है।

बड़े गर्व से कहा जाता है कि यह Eyes, Nose बता लेता है और साथ ही इसे मोबाइल के बिना चैन ही नहीं पड़ता तो लीजिए हमारे भोले भाले दयालु और उदार प्रकृति ने आज हमें ऐसी जगह ला खड़ा कर दिया है जहां सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है। तो मोबाइल, कंप्यूटर लैपटॉप की महत्ता अत्यंत बढ़ गई है।


ऑनलाइन स्कूल चल रहे हैं। परीक्षाएं हो रही हैं और साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य को एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।


अभी कुछ दिन पहले ही पढ़ा था कि ऑनलाइन क्लास करने से और लगातार एक जगह बैठे रहने से बच्चों में कितने मानसिक विकार पैदा हो रहे हैं और साथ ही उनकी आंखों के लिए नई समस्याएं जन्म ले रही हैं, तो ऐसे में बरबस गुजरा हुआ जमाना मतलब हमारी उम्र वालों का जमाना याद आता है जहां पढ़ाई कभी समस्या नहीं थी। 

पढ़ाई के साथ साथ मस्ती की पाठशाला भी चलती थी।


वैसे तो हमारी भारतीय संस्कृति में गुरुकुल शिक्षा पद्धति थी, जहां पर व्यक्तित्व निर्माण की शिक्षा दी जाती थी। उस समय का दौर बीता तो धीरे-धीरे बहुत से बदलावों के  बाद आजाद भारत की गुलाम शिक्षा पद्धति ने स्थान ले लिया। जहां पर बस अंग्रेज बनाने की होड़ लग गई है। आज के दौर में अगर बच्चा अंग्रेजी स्कूल में नहीं पड़ता है तो यह एक शर्म की बात मानी जाती है।

सरकारी स्कूलों में भी अंग्रेजी माध्यम के अलग कक्षाएं चलती हैं। चलिए भाषा से किसी को कोई बैर रही है, परंतु बच्चों का शोषण भाषा के नाम पर किया जाना तो सर्वथा अनुचित है।


कोरोनावायरस में एक बड़ी समस्या आई कि बच्चों की पढ़ाई कैसे शुरू की जाए?? स्कूल जाना तो अभी संभव नहीं जान पड़ता तो ऑनलाइन। बच्चे  शुरू शुरू में तो बहुत खुश हुए लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्वास्थ्य समस्याएं खासकर आंखों के लिए हानिकारक बन गई।


"जान है तो जहान है" का सिद्धांत कम से कम बच्चों के लिए तो होना ही चाहिए। यह ज्यादा उचित होता कि 1 साल की पढ़ाई बच्चों की रुचि के अनुसार कुछ क्रियात्मक कार्य करके करवाई जाती इससे ना तो अभिभावकों पर कोई आर्थिक बोझ पड़ता और ना ही बच्चों को एक ही स्थान पर बैठे-बैठे अपनी आंखों और दिमाग को ऑनलाइन करना पड़ता।


कोविड-19 में बहुत से देशों में 0 शिक्षा सत्र कर दिया गया जो कि एक सराहनीय कदम है, क्योंकि जान जोखिम में डालकर अनावश्यक आर्थिक और मानसिक तनाव की कोई आवश्यकता नहीं जान पड़ती है।


ऐसे में हमारे देश में कौन सी नौकरियों की बाढ़ आ गई है कि अगर बच्चे एक साल नहीं पढ़ेंगे तो सब नौकरियां व्यर्थ हो जाएंगी। जैसे हम सब बातों में अपने को पढ़ा-लिखा कहते हैं, तो उसी तरह बच्चों के भविष्य को लेकर भी हमें अपने अनुभव के आधार पर उनके उचित विकास के लिए अब रटन्त विद्या को छोड़कर वास्तव में मस्ती की पाठशाला पर जरूर ध्यान देना चाहिए। उनके अंदर के कौशल को निखारने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए।

 यह बहुत ही अच्छा अवसर था जबकि बच्चे पढ़ाई के बोझ से बच कर अपने अंदर छिपी प्रतिभा पर भी ध्यान दे पाते।


यह एक तरह से देश हित में भी सार्थक कदम होता, क्योंकि इतनी बड़ी जनसंख्या वाले देश में सिर्फ सरकारी, गैर सरकारी नौकरियां ही नहीं वरन व्यक्तिगत तौर पर अपने गुणों का विकास करना और उसके आधार पर अपनी जीविका के लिए आगे बढ़ने का विचार भी बहुत सहायक होता।


मस्ती की पाठशाला हर उम्र के लिए उतनी ही जरूरी है। अनावश्यक तनाव से कार्यक्षमता पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, फिर वह चाहे किसी भी उम्र का हो। अभी भी समय है जो बीत गया उससे अनुभव लेते हुए अपने देश के युवाओं और बच्चों के लिए एक स्वस्थ वातावरण को तैयार करना नितांत आवश्यक ही नहीं वरन् हम सबकी जिम्मेदारी भी है। 


देश का भविष्य इन्हीं बच्चों और युवाओं के हाथों में है, तो हमारे अनुभव का लाभ भी तो उनके लिए उतना ही जरूरी है क्योंकि अगर हमने तनाव रहित वातावरण का सुख पाया है तो हमारी इस पीढ़ी को और आगे आने वाली पीढ़ियों को भी वही सुख पाने का पूरा अधिकार है। 


अनुभव भी यही कहता है कि जब से सरकारी नौकरियों को ज्यादा वरीयता दी जाने लगी है तबसे बेरोजगारी लगातार बढ़ती ही जा रही है।

फिर क्यों ना अपनी प्रतिभा को ही अपने जीवन यापन का आधार बनाया जाए और यह तभी संभव है, जब इस गला काट प्रतिस्पर्धा से हटकर सभी स्व रोजगार की तरफ अपना ध्यान दें। कुछ पाने के लिए कुछ नया सोचना और उसे क्रियान्वित करना तो हर तरह से उचित ही जान पड़ता है।

धन्यवाद

डॉ. कुसुम पांडेय

वरिष्ठ अधिवक्ता समाजसेवी एवं लेखिका

सहयोगी दलों के सहयोग से एनडीए तीसरी बार भी अपनी नैया पार लगाने की फिराक मे।

  आचार्य श्रीकान्त शास्त्री, वरिष्ठ पत्रकार  देश में आम चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां बड़ने लगी है और हर पार्टिया ‌अपनी ...