सीडीएस की तर्ज पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की जगह मीडिया काउंसिल बनाए सरकार:- शास्त्री

 

{"प्रेस काउंसिल आफ इंडिया की जगह मीडिया काउंसिल बनाए सरकार, ताकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का भी हित संरक्षित हो सके"}


["पत्रकारों को चौथे स्तंभ का दर्जा देकर अधिसूचित किया जाए एवं मीडिया कमीशन का पुनः पुनर्गठन हो व मीडिया प्रोटक्शन बिल लागू हो।"]



प्रयागराज, ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन "ऐप्रवा" के अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकान्त शास्त्री जी ने सरकार से मांग किया है और कहा जिस प्रकार से तीनों सेना को एक करके एक सीडीएस बनाया गया है उसी प्रकार से प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की जगह मीडिया काउंसिल बनाया जाये।


शास्त्री जी ने सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि सरकारे पत्रकारों के मामलों में अनदेखीं करतीं चलीं आ रही है जिस प्रकार से पत्रकारों को बिना लिखा पढ़ी कहने भर के लिए चौथा स्तंभ कहा जाता है लेकिन ऐसा है नहीं, यह बहुत ही खेद का विषय है और इससे भद्दा मजाक भी नहीं हो सकता, सरकार जल्द पत्रकारों को चौथे स्तंभ का दर्जा देकर अधिसूचित करें" एवं मीडिया कमीशन का पुनर्गठन कराए और साथ ही मीडिया प्रोटेक्शन बिल लागू हो अन्यथा की स्थिति में [ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन] "ऐप्रवा" परिवार की ओर से देशभर में बड़ा आंदोलन के साथ जन जागरण किया जाएगा।


शास्त्री जी द्वारा पुनः बताया गया है कि निम्न सभी मांगों के सम्बन्ध में ऐप्रवा परिवार की ओर से दशको से जरिए रजिस्ट्री पत्र, ईमेल, सोशल मीडिया, समाचार पत्रों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं सक्षम अधिकारियों से मांग करता चला आ रहा हैं। लेकिन पत्रकारों की इस मांग को अभी तक ठंडे बस्ते में रखा गया है जो बहुत ही खेद का विषय है, जो समाज सबको उजाला दिखाता है उसी को अंधेरा मे रख दीया गया है। यदि इसमे अनदेखी की गयी तो, जिस प्रकार से पीसीआई के गड़बड़ झाले के खिलाफ एवं उ.प्र. प्रेस मान्यता समिति के संबंध में व पत्रकारों के अन्य समस्याओं के मामलों में जिस प्रकार से ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन परिवार द्वारा न्यायालय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया है उसी प्रकार से इसमें भी न्याय पाने के लिए ऐप्रवा परिवार न्यायालय का दरवाजा खटखटायेगा।

पत्रकारों की योग्यता निर्धारित करवाने के सन्दर्भ में भारतीय प्रेस परिषद में एक महत्वपूर्ण बैठक का निर्धारण

 चिकित्सकों, अधिवक्ताओं के तर्ज पर पत्रकारों के भी योग्यता निर्धारित करने के लिए PCI में विचार मंथन शुरू:-


आंल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री ने कहा, वकालत के पेशे में एलएलबी की डिग्री के साथ बार काउंसिल में पंजीकरण जरूरी होता है। इसी तरह मेडिकल पेशे में एमबीबीएस होना जरूरी योग्यता है और साथ में मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण भी कराना होता है लेकिन पत्रकारिता के क्षेत्र में ऐसा कुछ भी नहीं है। पत्रकारों के पंजीकरण एवं योग्यता निर्धारित करवाने के लिए ऐप्रवा अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकान्त शास्त्री की ओर से दशकों से प्रयास के साथ साथ सम्मानित सासंदों, विधायको एवं अन्य जनप्रतिनिधियो, संपादकों, वरिष्ठ पत्रकारों व विश्वविद्यालयों के माध्यम से सैकड़ों पत्र मा. प्रधानमंत्री, मा. सूचना प्रसारण मंत्री एवं मा. अध्यक्ष भारतीय प्रेस परिषद को जरिए रजिस्ट्री, ईमेल व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मो के माध्यम से भेजा गया है। 


उपरोक्त के संबंध में  तत्कालीन अध्यक्ष, भारतीय प्रेस परिषद, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्री मारकंडे काटजू ने भी पत्रकारों के योग्यता निर्धारित करने की बात रखते हुए गठित समिति को और मजबूती देते हुए जल्द प्रभावी कार्यवाही करने के लिए कहा था। 



जिसके संबंध में वर्तमान PCI की अध्यक्ष ने पत्रकारों के उपरोक्त समस्या को दृष्टिगत रखते हुए इस विषय पर संज्ञान लेकर एक बैठक 14/12/22 को निर्धारित किया है, जिसके लिए #ऐप्रवा परिवार ने उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए जल्द से जल्द योग्यता निर्धारित करने की मांग की है। 


#पत्रकार_एकता_जिंदाबाद

सभी अखबारों को समानता से विज्ञापन जारी हो: शास्त्री





 


(न्यायालय, मानवाधिकार एवं सरकार की मंशा रहती है, सबके साथ न्याय एवं समानता, लघु एवं मझोले अखबारों के साथ भेदभाव क्यों? जिसके लिए ऐप्रवा की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र।)


प्रयागराज, ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकान्त शास्त्री ने बताया कि प्रायः सरकार की जन उपयोगी विकासशील एवं महत्वपूर्ण कार्यों को प्रदेश के लघु व मझौले अखबार शहर से लेकर ग्रामीण तक के जन मानस को बताने एवं उनके पास तक आपकी योजनाओं को पहुंचाने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका रहती हैं। लेकिन विज्ञापन के मामलों में जिम्मेदार लोगों द्वारा जो व्यवहार कुछ चुनिंदा लोगों के साथ किया जाता है वह व्यवहार लघु व मझौले अखबारों के साथ नहीं किया जाता, यह कार्य बहुत ही घृणित एवं निंदनीय है। और सरकार को बदनाम करने की साजिश है, तथा सबका साथ और सब के विकास वाले नारे का अपमान है और डबल इंजन की सरकार द्वारा जिस प्रकार से राष्ट्रहित सर्वोपरि के साथ कार्य किया जा रहा है उसमें उपरोक्त लोगों द्वारा प्रश्नचिन्ह खड़ा किया जा रहा है जो बहुत ही चिंतनीय, सोचनीय एवं निंदनीय है जहां एक देश एक कानून की बात होती हो, वही कुछ नौकरशाहो/तनखइया लोगों द्वारा एक देश दो कानून की स्थिति पैदा किया जा रहा है, जो बहुत ही दुखद है। साथ ही लोकप्रिय एवं जनप्रिय सरकार में किसी को ज्यादा किसी को कम करना सरकार को बदनाम करने की साजिश है।





शास्त्री जी द्वारा यह भी बताया गया कि निम्न सभी मांगों के सम्बन्ध में ऐप्रवा परिवार की ओर से दशको से जरिए रजिस्ट्री पत्र, ईमेल, सोशल मीडिया, अखबार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से मुख्यमन्त्री, प्रधानमंत्री एवं अधिकारियों से मांग करता चला आ रहा हैं। लेकिन पत्रकारों की इस मांग को अभी तक ठंडे बस्ते में रखा गया है जो बहुत ही खेद का विषय है, जो समाज सबको उजाला दिखाता है उसी को अंधेरा मे रखा गया है। जहां एक ओर देश की न्यायप्रिय सरकार एवं न्यायपालिका व मानवाधिकार आदि की भी यही मंशा रहती है कि हर जगह न्याय के साथ समानता के आधार पर कार्य हो वही दूसरी ओर लघु एवं मझोले समाचार पत्रों के साथ अनदेखी किया जाना अनुचित तथा दुर्भाग्यपूर्ण है।


यहां शास्त्री जी द्वारा पुनः बताया गया है कि यदि इसमे अनदेखी की गयी तो, जिस प्रकार से पीसीआई के गड़बड़ झाले के खिलाफ एवं उ.प्र. प्रेस मान्यता समिति में हो रही देरी के विरुद्ध व पत्रकारों के अन्य समस्याओं के मामलों में ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन परिवार द्वारा न्यायालय से न्याय पाया गया है उसी प्रकार से इसमें भी न्याय पाने के लिए ऐप्रवा परिवार न्यायालय का दरवाजा खटखटायेगा।

हाईकोर्ट ने यूपी प्रेस मान्यता समिति गठित करने के लिए किया डेट फिक्स




[इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिनांक 13 अक्टूबर 22 को कड़ा रुख दिखाते हुए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया है कि उ.प्र. प्रेस मान्यता समिति गठित कर 15 नवंबर 2022 को कोर्ट को सूचित करें।] 


प्रयागराज। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उ.प्र. की ओर से दिनांक 16 जून 2020 को प्रेस मान्यता समिति गठित करने के लिए एक विज्ञापन जारी किया गया था, उक्त के संदर्भ में प्रदेश के सभी लोगों के साथ पत्रकारो के मान सम्मान एवं उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) ने भी उक्त समिति के गठन के लिए दावा किया था। उक्त समिति के गठन में हो रही देरी के सम्बन्ध में ऐप्रवा की ओर से मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के आला अधिकारियों को पत्र भेजा गया था जिसमें उत्तर प्रदेश शासन ने ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) को सम्मिलित करने के लिए एक पत्र निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उ.प्र. को भेजा था। जिसके बावजूद भी कोई कार्यवाही न होने पर, ऐप्रवा की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में फरवरी 2022 में एक याचिका दाखिल की गई जिसमें उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश शासन से मान्यता समिति के गठन के लिए जवाब मांगा जिसमें शासन की ओर से यह बताया गया था कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के कारण नई सरकार बनने के बाद 

 प्रेस मान्यता समिति का गठन करने की कार्यवाही कर ली जाएगी। इस पर कोर्ट ने उनसे से सपथ पत्र लेकर यह कहते हुए याचिका निस्तारित किया था कि यदि नयी सरकार बनने के बाद मान्यता समिति गठित नहीं होता तो याची फिर से याचिका दायर कर सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज गुप्ता व न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की खंडपीठ ने दिया था। नई सरकार बनने पर ऐप्रवा के अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी की ओर से अनुस्मारक/स्मरण पत्र शासन को भेजा गया जिसके बावजूद भी उ.प्र.मान्यता समिति का गठन नहीं हो पाया, तत्पश्चात कोर्ट के आदेश के क्रम में पुनः आंल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री की तरफ से याचिका दाखिल किया गया। जिसमें न्यायमूर्ति मनोज मिश्र एवं न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खण्डपीठ ने पहले तो सरकार से पूछा था की अभी तक उ.प्र. प्रेस मान्यता समिति का गठन हुआ है कि नहीं और साथ ही नियमावली के जवाब मांगते हुए तिथि नियत कर थी। जिसमें विभाग द्वारा हिला हवाली किया जाता रहा। जिसको दृष्टिगत रखते हुए न्यायमूर्ति मनोज मिश्र एवं न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने दिनांक 13 अक्टूबर 22 को कड़ा रुख दिखाते हुए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश प्रेस मान्यता समिति को गठित कर दिनांक 15 नवंबर 2022 को कोर्ट को सूचित करें।





इस प्रकरण को सूचना विभाग ने इसी प्रकार से लगभग 28 महीनों से लटका रखा है जिस पर मा. उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने अपने तल्ख तेवर दिखाते हुए समिति गठित कर न्यायालय में सूचित करने को कहा है।

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पत्रकार हितों को लेकर जारी रहेगी लड़ाई: आचार्य श्रीकांत शास्त्री

 


भदोही। ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री ने कहा है कि पत्रकार हितों के लिए संगठन के स्तर से जारी लड़ाई अब उच्च न्यायालय तक पहुंच गई है उच्च न्यायालय में पत्रकार ही तो के मामलों को लेकर याचिका दाखिल की गई है जिसमें हाईकोर्ट ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) को नोटिस जारी किया है। एसोसिएशन ने प्रदेश मान्यता समिति गठित ना होने का भी मामला उठाया है। जिसमें भी मा. उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उ.प्र. प्रेस मान्यता समिति गठित करने के लिए आदेश जारी कर चुका है, सूचना विभाग द्वारा समिति गठित ना किये जाने पर उच्च न्यायालय ने पुनः नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।


प्रयागराज से काशी जाते समय भदोही जिले के चकपरौना गोपीगंज में वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश द्विवेदी ने आचार्य श्रीकांत शास्त्री का स्वागत किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीकांत शास्त्री ने कहा कि प्रदेश एवं देश के पत्रकारों के हितों की लड़ाई को लेकर ऐप्रवा लगातार आवाज उठाता चला आ रहा है। अब पत्रकार हितों की यह लड़ाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक पहुंच चुकी है। पत्रकारों के हितों से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने पीसीआई को नोटिस जारी की है एवं प्रेस मान्यता समिति गठित करने के लिए उ.प्र. सरकार को आदेशित किया है। साथ ही श्री शास्त्री जी के द्वारा यह भी बताया गया कि जिस प्रकार से ऐप्रवा के अथक प्रयास से पत्रकारों को पेंशन तथा स्वास्थ्य सुविधाएं देने की मांग को स्वीकारा गया, जिसके लिए ऐप्रवा परिवार सरकार का हार्दिक स्वागत करता है।


इस दौरान भदोही के वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश द्विवेदी ने आचार्य श्रीकांत शास्त्री के पत्रकार हित की लड़ाई को पत्रकारिता के क्षेत्र में मील का पत्थर बताया। कहा कि आचार्य श्रीकांत शास्त्री का यह संघर्ष पत्रकारिता जगत के इतिहास के पन्नें में लिखा जाएगा। इस दौरान प्रयाग उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी, डा. प्रमोद शुक्ला, सुबोध त्रिपाठी, योगेश जी, वी.के. मिश्र समेत अन्य कई लोग मौजूद थे।

प्रेस मान्यता समिति गठित न करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से की जवाब तलबी...



[कोर्ट ने कड़ा रुख करते हुए सरकार से पूंछा है कि अभी तक उ.प्र. प्रेस मान्यता समिति का गठन हुआ है कि नहीं]


प्रयागराज। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उ.प्र. की ओर से दिनांक 16 जून 2020 को प्रेस मान्यता समिति गठित करने के लिए एक विज्ञापन जारी किया गया था, उक्त के संदर्भ में प्रदेश के अन्य संगठनों के साथ आंल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) की ओर से भी आवेदन किया गया था। उक्त समिति के गठन में हो रही देरी के सम्बन्ध में ऐप्रवा की ओर से मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के आला अधिकारियों को पत्र भेजा था जिसमें उत्तर प्रदेश शासन ने ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) को सम्मिलित करने के लिए एक पत्र निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उ.प्र. को भेजा था। जिसके बावजूद भी कोई कार्यवाही न होने पर, ऐप्रवा की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में फरवरी 2022 में एक याचिका दाखिल की गई जिसमें उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश शासन से मान्यता समिति के गठन के लिए जवाब मांगा जिसमें शासन की ओर से यह बताया गया था कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के कारण नई सरकार बनने के बाद ही प्रेस मान्यता समिति का गठन करने की कार्यवाही हो पाएगी। इस जानकारी के बाद कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका निस्तारित किया था कि यदि सरकार बनने के बाद मान्यता समिति गठित नहीं होती तो याची फिर याचिका दायर कर सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज गुप्ता व न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की खंडपीठ ने दिया था। नई सरकार बनने पर ऐप्रवा के अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी की ओर से अनुस्मारक/स्मरण पत्र शासन को भेजा गया  जिसके बावजूद भी उ.प्र.मान्यता समिति का गठन नहीं हो पाया, तत्पश्चात कोर्ट के आदेश के क्रम में पुनः आंल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री की तरफ से दाखिल किया गया। जिसमें 14 सितंबर 2022 को न्यायमूर्ति मनोज मिश्र एवं न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खण्डपीठ ने अगली तिथि 30/09/22 की नियत करते हुए उ.प्र. सरकार से जवाब मांगा है और पूछा है कि अब तक उ.प्र. प्रेस मान्यता समिति का गठन हुआ है कि नहीं।

हाईकोर्ट ने PCI चेयरमैन एवं सचिव को जारी किया नोटिस


प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा अपने 14 वे कार्यकाल के गठन के लिए दि. 07/03/21 को देशभर के सभी पत्रकार संगठनो से सदस्यता के लिए अखबारो के विज्ञापन के माध्यम से विभिन्न कैटेगरी में सदस्यता के लिए आवेदन मांगा गया था जिसमें पत्रकार संगठन, एसोसिएशन, क्लब, संघ, यूनियन आदि ने अपना अपना दावा प्रस्तुत किया था। उपरोक्त सभी दावों को प्रेस काउंसिल आफ इंडिया ने अपने दिनांकित 07/04/21 की नोटिस मे कैटेगरी वॉइज सूची जारी कर दिया।



प्रेस काउंसिल के 14 वे कार्यकाल के गठन के लिए चेयरमैन की अध्यक्षता में सदस्यो/ दावाकर्ताओ के बीच कई बैठके हुई और उसमें कार्यकारिणी ने जिस आवेदक के सदस्यता दावा को खारिज कर दिया था जिसमें से कई को चेयरमैन प्रेस काउंसिल ने अकेले बिना कानूनी अधिकार के नामिनेट कर दिया इसी तरह सदस्यता चयन में कई प्रकार से कई लोगों के साथ धांधली की गई है जिसके विरुद्ध याचिका दाखिल हुई है। उपरोक्त धांधली के खिलाफ ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकान्त शास्त्री ने उक्त कार्यकारिणी में हुए गैर कानूनी चुनाव को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जिसमें याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी के तर्क को सुनकर दिनांक 27/09/21 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मुनेश्वर नाथ भंडारी एवं न्यायमूर्ति पियूष अग्रवाल जी ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन व सचिव को नोटिस जारी कर चार सप्ताह मे जवाब मांगा है।

पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव के मामले में सही न्याय मिलने तक आर-पार की लड़ाई लडे़गा ऐप्रवा:- शास्त्री


"राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को भेजा मांग-पत्र"

आंल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री ने प्रतापगढ़ में एबीपी गंगा न्यूज चैनल के टीवी पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की हत्या पर गहरा रोष जताया है। उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर दिवंगत पत्रकार की पत्नी को सरकारी नौकरी देने और बच्चों की शिक्षा-दीक्षा कराने की मांग की है। आचार्य श्रीकांत शास्त्री ने अपने पत्र में कहा है कि सुलभ श्रीवास्तव की नृशंस हत्या की जितनी भी निंदा की जाए कम है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जो भी दोषी पाया जाए उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने मांग किया है कि मृत पत्रकार की पत्नी को सरकारी नौकरी और तात्कालिक आर्थिक सहायता दी जाए।

ऐप्रवा परिवार ने विश्व पर्यावरण दिवस को जीवंत दिवस के रूप में मनाया।

 

विश्व पर्यावरण दिवस 2021 की थीम इस साल इकोसिस्टम रेस्टोरेशन यानी कि पारिस्थितिकी तंत्र बहाली है। इकोसिस्‍टम रेस्‍टोरेशन के तहत पेड़ लगाकर या पर्यावरण की रक्षा कर प्रदूषण के बढ़ते स्तर को कम करना और इकोसिस्‍टम पर बढ़ते दबाव को कम करना है। पर्यावरण दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा वृहद वृक्षारोपण किया गया। ऐप्रवा परिवार की ओर से सर्वप्रथम परमानंद त्रिपाठी (सोंटा स्वामी) ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में लोगों के बीच पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, ग्रीन हाउस के प्रभाव, ग्लोबल वार्मिंग, ब्लैक होल इफेक्ट आदि ज्वलंत मुद्दों और इनसे होने वाली विभिन्न समस्याओं के प्रति सामान्‍य लोगों को जागरूक करना है और पर्यावरण की रक्षा के लिए उन्‍हें हर संभव प्रेरित करना है। 


एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकान्त शास्त्री ने बताया कि प्रकृति से जोडना ही समय की मांग है। इसकी अनदेखा हमें विनाश की ओर धकेल रही है। पर्यावरण की बढ़ती समस्या का हल तभी निकाला जा सकता है, जब हर नागरिक अपनी-अपनी भूमिका तय करे। हमारी बढ़ती भौतिकतावादी जरूरतों के कारण प्रकृति को काफी नुकसान हुआ है। 


ऐप्रवा परिवार की ओर से संजय सिंह ने कहा कि भविष्य में पर्यावरणीय समस्याओं से लड़ने के लिए स्कूल स्तर पर शिक्षा प्रणाली को ज्यादा से ज्यादा व्यवाहारिक बनाने की जरूरत होगी, तभी हम मानव अस्तित्व को बचा सकते हैं। इसके लिए बच्चों के साथ-साथ पैरंट्स को भी साथ आने की जरूरत है। ऐप्रवा की ओर से अभय शंकर पाण्डेय ने बताया कि संपूर्ण मानवता का अस्तित्व प्रकृति पर निर्भर है। इसलिए एक स्वस्थ एवं सुरक्षित पर्यावरण के बिना मानव समाज की कल्पना अधूरी है। ऐप्रवा की ओर से संपादक दिनेश मिश्रा ने बताया कि वृक्ष हमारे पर्यावरण के महत्वपूर्ण एवं अभिन्न घटक हैं। वृक्षों के बिना पृथ्वी पर मनुष्य अथवा किसी भी जीव - जन्तु - पशु - पक्षी का जीवन संभव नहीं है।


ऐप्रवा परिवार की ओर से संपादक अरविंद सिंह बिसेन एवं पत्रकार अमर चंद्र पटेल ने बताया कि वर्तमान समय में विकास तथा शहरीकरण के कारण हरे वृक्षों की अंधाधुंध कटाई हो रही है जिससे हमारा पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। ज्यों - ज्यों वृक्षों की संख्या घटती जा रही है, त्यों-त्यों मानव जीवन पर संकट बढ़ता जा रहा है। ऐप्रवा परिवार की ओर से संपादक बी.डी. पांडेय एवं पत्रकार विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि  पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिये अधिक से अधिक वृक्ष लगाए जाय जिससे पानी एवं शुद्ध आक्सीजन मिलती रहे। ऐप्रवा परिवार की ओर से मुकेश गुप्ता, दिलीप चंद्र पांडे, आशीष जायसवाल, देवाशीष श्रीवास्तव ने भी वर्तमान समस्या को दृष्टिगत रखते हुये लोगो को वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में उपरोक्त लोगों के अलावा तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

सहयोगी दलों के सहयोग से एनडीए तीसरी बार भी अपनी नैया पार लगाने की फिराक मे।

  आचार्य श्रीकान्त शास्त्री, वरिष्ठ पत्रकार  देश में आम चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां बड़ने लगी है और हर पार्टिया ‌अपनी ...