हाईकोर्ट ने यूपी प्रेस मान्यता समिति गठित करने के लिए किया डेट फिक्स




[इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिनांक 13 अक्टूबर 22 को कड़ा रुख दिखाते हुए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया है कि उ.प्र. प्रेस मान्यता समिति गठित कर 15 नवंबर 2022 को कोर्ट को सूचित करें।] 


प्रयागराज। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उ.प्र. की ओर से दिनांक 16 जून 2020 को प्रेस मान्यता समिति गठित करने के लिए एक विज्ञापन जारी किया गया था, उक्त के संदर्भ में प्रदेश के सभी लोगों के साथ पत्रकारो के मान सम्मान एवं उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) ने भी उक्त समिति के गठन के लिए दावा किया था। उक्त समिति के गठन में हो रही देरी के सम्बन्ध में ऐप्रवा की ओर से मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के आला अधिकारियों को पत्र भेजा गया था जिसमें उत्तर प्रदेश शासन ने ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) को सम्मिलित करने के लिए एक पत्र निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उ.प्र. को भेजा था। जिसके बावजूद भी कोई कार्यवाही न होने पर, ऐप्रवा की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में फरवरी 2022 में एक याचिका दाखिल की गई जिसमें उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश शासन से मान्यता समिति के गठन के लिए जवाब मांगा जिसमें शासन की ओर से यह बताया गया था कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के कारण नई सरकार बनने के बाद 

 प्रेस मान्यता समिति का गठन करने की कार्यवाही कर ली जाएगी। इस पर कोर्ट ने उनसे से सपथ पत्र लेकर यह कहते हुए याचिका निस्तारित किया था कि यदि नयी सरकार बनने के बाद मान्यता समिति गठित नहीं होता तो याची फिर से याचिका दायर कर सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज गुप्ता व न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की खंडपीठ ने दिया था। नई सरकार बनने पर ऐप्रवा के अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी की ओर से अनुस्मारक/स्मरण पत्र शासन को भेजा गया जिसके बावजूद भी उ.प्र.मान्यता समिति का गठन नहीं हो पाया, तत्पश्चात कोर्ट के आदेश के क्रम में पुनः आंल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री की तरफ से याचिका दाखिल किया गया। जिसमें न्यायमूर्ति मनोज मिश्र एवं न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खण्डपीठ ने पहले तो सरकार से पूछा था की अभी तक उ.प्र. प्रेस मान्यता समिति का गठन हुआ है कि नहीं और साथ ही नियमावली के जवाब मांगते हुए तिथि नियत कर थी। जिसमें विभाग द्वारा हिला हवाली किया जाता रहा। जिसको दृष्टिगत रखते हुए न्यायमूर्ति मनोज मिश्र एवं न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने दिनांक 13 अक्टूबर 22 को कड़ा रुख दिखाते हुए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश प्रेस मान्यता समिति को गठित कर दिनांक 15 नवंबर 2022 को कोर्ट को सूचित करें।





इस प्रकरण को सूचना विभाग ने इसी प्रकार से लगभग 28 महीनों से लटका रखा है जिस पर मा. उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने अपने तल्ख तेवर दिखाते हुए समिति गठित कर न्यायालय में सूचित करने को कहा है।

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पत्रकार हितों को लेकर जारी रहेगी लड़ाई: आचार्य श्रीकांत शास्त्री

 


भदोही। ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री ने कहा है कि पत्रकार हितों के लिए संगठन के स्तर से जारी लड़ाई अब उच्च न्यायालय तक पहुंच गई है उच्च न्यायालय में पत्रकार ही तो के मामलों को लेकर याचिका दाखिल की गई है जिसमें हाईकोर्ट ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) को नोटिस जारी किया है। एसोसिएशन ने प्रदेश मान्यता समिति गठित ना होने का भी मामला उठाया है। जिसमें भी मा. उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उ.प्र. प्रेस मान्यता समिति गठित करने के लिए आदेश जारी कर चुका है, सूचना विभाग द्वारा समिति गठित ना किये जाने पर उच्च न्यायालय ने पुनः नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।


प्रयागराज से काशी जाते समय भदोही जिले के चकपरौना गोपीगंज में वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश द्विवेदी ने आचार्य श्रीकांत शास्त्री का स्वागत किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीकांत शास्त्री ने कहा कि प्रदेश एवं देश के पत्रकारों के हितों की लड़ाई को लेकर ऐप्रवा लगातार आवाज उठाता चला आ रहा है। अब पत्रकार हितों की यह लड़ाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक पहुंच चुकी है। पत्रकारों के हितों से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने पीसीआई को नोटिस जारी की है एवं प्रेस मान्यता समिति गठित करने के लिए उ.प्र. सरकार को आदेशित किया है। साथ ही श्री शास्त्री जी के द्वारा यह भी बताया गया कि जिस प्रकार से ऐप्रवा के अथक प्रयास से पत्रकारों को पेंशन तथा स्वास्थ्य सुविधाएं देने की मांग को स्वीकारा गया, जिसके लिए ऐप्रवा परिवार सरकार का हार्दिक स्वागत करता है।


इस दौरान भदोही के वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश द्विवेदी ने आचार्य श्रीकांत शास्त्री के पत्रकार हित की लड़ाई को पत्रकारिता के क्षेत्र में मील का पत्थर बताया। कहा कि आचार्य श्रीकांत शास्त्री का यह संघर्ष पत्रकारिता जगत के इतिहास के पन्नें में लिखा जाएगा। इस दौरान प्रयाग उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी, डा. प्रमोद शुक्ला, सुबोध त्रिपाठी, योगेश जी, वी.के. मिश्र समेत अन्य कई लोग मौजूद थे।

प्रेस मान्यता समिति गठित न करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से की जवाब तलबी...



[कोर्ट ने कड़ा रुख करते हुए सरकार से पूंछा है कि अभी तक उ.प्र. प्रेस मान्यता समिति का गठन हुआ है कि नहीं]


प्रयागराज। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उ.प्र. की ओर से दिनांक 16 जून 2020 को प्रेस मान्यता समिति गठित करने के लिए एक विज्ञापन जारी किया गया था, उक्त के संदर्भ में प्रदेश के अन्य संगठनों के साथ आंल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) की ओर से भी आवेदन किया गया था। उक्त समिति के गठन में हो रही देरी के सम्बन्ध में ऐप्रवा की ओर से मुख्यमंत्री सहित प्रदेश के आला अधिकारियों को पत्र भेजा था जिसमें उत्तर प्रदेश शासन ने ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) को सम्मिलित करने के लिए एक पत्र निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उ.प्र. को भेजा था। जिसके बावजूद भी कोई कार्यवाही न होने पर, ऐप्रवा की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में फरवरी 2022 में एक याचिका दाखिल की गई जिसमें उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश शासन से मान्यता समिति के गठन के लिए जवाब मांगा जिसमें शासन की ओर से यह बताया गया था कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के कारण नई सरकार बनने के बाद ही प्रेस मान्यता समिति का गठन करने की कार्यवाही हो पाएगी। इस जानकारी के बाद कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका निस्तारित किया था कि यदि सरकार बनने के बाद मान्यता समिति गठित नहीं होती तो याची फिर याचिका दायर कर सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज गुप्ता व न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की खंडपीठ ने दिया था। नई सरकार बनने पर ऐप्रवा के अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी की ओर से अनुस्मारक/स्मरण पत्र शासन को भेजा गया  जिसके बावजूद भी उ.प्र.मान्यता समिति का गठन नहीं हो पाया, तत्पश्चात कोर्ट के आदेश के क्रम में पुनः आंल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन (ऐप्रवा) के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री की तरफ से दाखिल किया गया। जिसमें 14 सितंबर 2022 को न्यायमूर्ति मनोज मिश्र एवं न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खण्डपीठ ने अगली तिथि 30/09/22 की नियत करते हुए उ.प्र. सरकार से जवाब मांगा है और पूछा है कि अब तक उ.प्र. प्रेस मान्यता समिति का गठन हुआ है कि नहीं।

हाईकोर्ट ने PCI चेयरमैन एवं सचिव को जारी किया नोटिस


प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा अपने 14 वे कार्यकाल के गठन के लिए दि. 07/03/21 को देशभर के सभी पत्रकार संगठनो से सदस्यता के लिए अखबारो के विज्ञापन के माध्यम से विभिन्न कैटेगरी में सदस्यता के लिए आवेदन मांगा गया था जिसमें पत्रकार संगठन, एसोसिएशन, क्लब, संघ, यूनियन आदि ने अपना अपना दावा प्रस्तुत किया था। उपरोक्त सभी दावों को प्रेस काउंसिल आफ इंडिया ने अपने दिनांकित 07/04/21 की नोटिस मे कैटेगरी वॉइज सूची जारी कर दिया।



प्रेस काउंसिल के 14 वे कार्यकाल के गठन के लिए चेयरमैन की अध्यक्षता में सदस्यो/ दावाकर्ताओ के बीच कई बैठके हुई और उसमें कार्यकारिणी ने जिस आवेदक के सदस्यता दावा को खारिज कर दिया था जिसमें से कई को चेयरमैन प्रेस काउंसिल ने अकेले बिना कानूनी अधिकार के नामिनेट कर दिया इसी तरह सदस्यता चयन में कई प्रकार से कई लोगों के साथ धांधली की गई है जिसके विरुद्ध याचिका दाखिल हुई है। उपरोक्त धांधली के खिलाफ ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकान्त शास्त्री ने उक्त कार्यकारिणी में हुए गैर कानूनी चुनाव को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जिसमें याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी के तर्क को सुनकर दिनांक 27/09/21 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मुनेश्वर नाथ भंडारी एवं न्यायमूर्ति पियूष अग्रवाल जी ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन व सचिव को नोटिस जारी कर चार सप्ताह मे जवाब मांगा है।

पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव के मामले में सही न्याय मिलने तक आर-पार की लड़ाई लडे़गा ऐप्रवा:- शास्त्री


"राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को भेजा मांग-पत्र"

आंल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री ने प्रतापगढ़ में एबीपी गंगा न्यूज चैनल के टीवी पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की हत्या पर गहरा रोष जताया है। उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर दिवंगत पत्रकार की पत्नी को सरकारी नौकरी देने और बच्चों की शिक्षा-दीक्षा कराने की मांग की है। आचार्य श्रीकांत शास्त्री ने अपने पत्र में कहा है कि सुलभ श्रीवास्तव की नृशंस हत्या की जितनी भी निंदा की जाए कम है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जो भी दोषी पाया जाए उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने मांग किया है कि मृत पत्रकार की पत्नी को सरकारी नौकरी और तात्कालिक आर्थिक सहायता दी जाए।

ऐप्रवा परिवार ने विश्व पर्यावरण दिवस को जीवंत दिवस के रूप में मनाया।

 

विश्व पर्यावरण दिवस 2021 की थीम इस साल इकोसिस्टम रेस्टोरेशन यानी कि पारिस्थितिकी तंत्र बहाली है। इकोसिस्‍टम रेस्‍टोरेशन के तहत पेड़ लगाकर या पर्यावरण की रक्षा कर प्रदूषण के बढ़ते स्तर को कम करना और इकोसिस्‍टम पर बढ़ते दबाव को कम करना है। पर्यावरण दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा वृहद वृक्षारोपण किया गया। ऐप्रवा परिवार की ओर से सर्वप्रथम परमानंद त्रिपाठी (सोंटा स्वामी) ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में लोगों के बीच पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, ग्रीन हाउस के प्रभाव, ग्लोबल वार्मिंग, ब्लैक होल इफेक्ट आदि ज्वलंत मुद्दों और इनसे होने वाली विभिन्न समस्याओं के प्रति सामान्‍य लोगों को जागरूक करना है और पर्यावरण की रक्षा के लिए उन्‍हें हर संभव प्रेरित करना है। 


एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकान्त शास्त्री ने बताया कि प्रकृति से जोडना ही समय की मांग है। इसकी अनदेखा हमें विनाश की ओर धकेल रही है। पर्यावरण की बढ़ती समस्या का हल तभी निकाला जा सकता है, जब हर नागरिक अपनी-अपनी भूमिका तय करे। हमारी बढ़ती भौतिकतावादी जरूरतों के कारण प्रकृति को काफी नुकसान हुआ है। 


ऐप्रवा परिवार की ओर से संजय सिंह ने कहा कि भविष्य में पर्यावरणीय समस्याओं से लड़ने के लिए स्कूल स्तर पर शिक्षा प्रणाली को ज्यादा से ज्यादा व्यवाहारिक बनाने की जरूरत होगी, तभी हम मानव अस्तित्व को बचा सकते हैं। इसके लिए बच्चों के साथ-साथ पैरंट्स को भी साथ आने की जरूरत है। ऐप्रवा की ओर से अभय शंकर पाण्डेय ने बताया कि संपूर्ण मानवता का अस्तित्व प्रकृति पर निर्भर है। इसलिए एक स्वस्थ एवं सुरक्षित पर्यावरण के बिना मानव समाज की कल्पना अधूरी है। ऐप्रवा की ओर से संपादक दिनेश मिश्रा ने बताया कि वृक्ष हमारे पर्यावरण के महत्वपूर्ण एवं अभिन्न घटक हैं। वृक्षों के बिना पृथ्वी पर मनुष्य अथवा किसी भी जीव - जन्तु - पशु - पक्षी का जीवन संभव नहीं है।


ऐप्रवा परिवार की ओर से संपादक अरविंद सिंह बिसेन एवं पत्रकार अमर चंद्र पटेल ने बताया कि वर्तमान समय में विकास तथा शहरीकरण के कारण हरे वृक्षों की अंधाधुंध कटाई हो रही है जिससे हमारा पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। ज्यों - ज्यों वृक्षों की संख्या घटती जा रही है, त्यों-त्यों मानव जीवन पर संकट बढ़ता जा रहा है। ऐप्रवा परिवार की ओर से संपादक बी.डी. पांडेय एवं पत्रकार विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि  पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिये अधिक से अधिक वृक्ष लगाए जाय जिससे पानी एवं शुद्ध आक्सीजन मिलती रहे। ऐप्रवा परिवार की ओर से मुकेश गुप्ता, दिलीप चंद्र पांडे, आशीष जायसवाल, देवाशीष श्रीवास्तव ने भी वर्तमान समस्या को दृष्टिगत रखते हुये लोगो को वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में उपरोक्त लोगों के अलावा तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

ऐप्रवा परिवार ने दिया महान पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा को श्रद्धांजलि* ।


ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन परिवार ने विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद व चिपको आंदोलन के जनक स्व. सुंदर लाल बहुगुणा जी को श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर ऐप्रवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री ने कहा कि सुंदरलाल बहुगुणा जी का निधन हमारे देश के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने के हमारे सदियों पुराने लोकाचार को प्रकट किया। उनकी सादगी और करुणा की भावना को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना काल में लोग बीमार हो रहे हैं तो उन्हें आक्सीजन की आवश्यकता पड़ रही है। जबकि स्व. बहुगुणा जी पहले ही जानते थे कि अगर मानव को जीवित रहना है तो हरे-भरे पेड़ को बचाना होगा। उन्होंने कहा कि विकास की इस आंधी में आज हजारों पेड़ काट दिये जा रहे हैं जिसके कारण तमाम प्रकार की बिमारियों ने जन्म ले लिया है। 


ऐप्रवा परिवार के अभय शंकर पाण्डेय ने कहा कि 'चिपको आंदोलन के प्रणेता, विश्व में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध महान पर्यावरणविद् पद्म विभूषण  सुंदरलाल बहुगुणा जी के निधन का अत्यंत पीड़ादायक है। स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा ने जीवन पर्यंत पेड़-पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य किया। सामाजिक समरसता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए जातिवाद ऊंच-नीच इन सब कुरीतियों को समाप्त कर पर्यावरणविद बहुगुणा ने एक आदर्श समाज की स्थापना के लिए प्रयास किया। 


ऐप्रवा परिवार के अमित पाठक ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 1986 में जमनालाल बजाज पुरस्कार और 2009 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। पर्यावरण संरक्षण के मैदान में स्व. सुंदरलाल बहुगुणा जी के कार्यों को इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।


कार्यक्रम में सर्वश्री संजय सिंह, विनय प्रकाश तिवारी, वी.डी. पांडेय, बंटी भाई, दिलीप चंद्र पांडेय आदि लोग उपस्थित रहे।

ऐप्रवा परिवार ने मनाया धूमधाम से हिंदी पत्रकारिता दिवस।

 


 ऑल इंडिया प्रेस रिपोर्टर वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से पत्रकारो ने हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर विचार व्यक्त करते हुए धूमधाम से मनाया। एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार आचार्य श्रीकांत शास्त्री ने सभी पत्रकारों को हिन्दी पत्रकारिता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सकारात्मक पत्रकारिता से ही समाज को नई दिशा और दशा प्रदान की जा सकती है। उन्होंने कहा कि दुनिया में पत्रकारिता आज भी जज्बें का काम माना जाता है। ऐप्रवा की ओर से संंजय सिंह ने कहा कि जंगे आजादी की लड़ाई में पत्रकारिता ने संघर्ष को अंजाम तक पहुंचाने में सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में आ रही चुनौतियों का सामना पत्रकारों को निर्भीकता के साथ करना होगा। ऐप्रवा की ओर से अभय शंकर पाण्डेय ने कहा कि मूल्यों का ह्रास होने से आज पत्रकारिता की तकलीफें बढ़ने लगी है। वर्तमान दौर में पत्रकारिता की कमजोरियों को दूर कर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना होगा।


30 मई  हिंदी पत्रकारिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। वैसे तो पत्रकारिता में बहुत सारे गौरवशाली और यादगार दिन हैं, लेकिन 195 साल पहले भारत में पहला हिंदी भाषा का समाचार पत्र 30 मई को ही प्रकाशित हुआ था। इसके पहले प्रकाशक और संपादक स्व. पं. जुगल किशोर शुक्ला का हिंदी पत्रकारिता के जगत में विशेष स्थान है।


स्व. पं. जुगल किशोर शुक्ला ने कलकत्ता से 30 मई को ही "उदन्त मार्तण्ड  नाम का एक साप्ताहिक समाचार पत्र के तौर पर शुरू किया था। शुरु से ही हिंदी पत्रकारिता को बहुत चुनौतियों का सामना करना पड़ा। समय के साथ इनका केवल स्वरूप बदला, लेकिन तमाम चुनौतियों के साथ ही हिंदी पत्रकारिता आज ने वैश्विक स्तर पर अपने उपस्थिति दर्ज कराई है।


हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत बंगाल से हुई थी, जिसका श्रेय राजा राममोहन राय को दिया जाता है। स्व. पं. जुगल किशोर शुक्ला जी ने कलकत्ता के कोलू टोला मोहल्ले की आमड़तल्ला गली से उदंत मार्तंड के प्रकाशन की शुरुआत की थी। उस समय अंग्रेजी, फारसी और बांग्ला में पहले से ही काफी समाचार पत्र निकल रहे थे, लेकिन हिंदी में एक भी समाचार पत्र नहीं निकल रहा था। यह समाचार पत्र लगभग एक वर्ष तक ही प्रकाशित हो सका, तत्कालीन ब्रिटिश सरकार का सहयोग न मिलने  एवं आर्थिक तंगी के कारण बंद हो गया। 

कार्यक्रम में ऐप्रवा परिवार की ओर से बी.डी पांडेय मिथिलेश वर्मा, विनय प्रकाश तिवारी, अमित पाठक, आशीष जाससवाल, मुकेश कुमार गुप्ता, दिलीप चंद्र पांडेय, संदीप समीर तिवारी आदि लोग उपस्थित रहे।

*समय का चक्र*


वक्त भी अजीब चीज है

वक्त के साथ ढल गये 

हम तो घर में रुक गए

तुम भी घर में ही रुक जाओ


वक्त है अजीबोगरीब

तन्हा रहना है जरूरी

पर अपनों की सुरक्षा के लिए

ध्यान भी देना पड़ता है

शादी और शहनाई से भी

अब तो दूर ही रहना पड़ता है


आते हैं निमंत्रण तो अवश्य करो स्वीकार

पर जाना जरूरी नहीं है इसका भी करो विचार


यह कैसी आपदा आई है

नहीं... यह तो हमारी ही लापरवाही है


साल बीत गया पर हम सोते ही रहे

मास्क को मजाक ही समझते रहे


जो लोग नियमों का पालन कर रहे थे

बहुतेरे तो बस अपनी नजरों से उन्हें

घूर ही रहे थे

कैसा विचित्र भाव था

पर अब लगता है

वही तो सही था


हर बार जनता ने

खुद नासमझी दिखाई है

अपनी गलती दूसरे के सिर पर डालकर


अपनी जिम्मेदारी से फुर्सत पाई है


पैसे और अमीर बनने की इच्छा ही ने

सारी फजीहत मचाई है....

दवा चोरी, ऑक्सीजन चोरी

सफेदपोशों की हर तरह की चोरी जारी है


उनके लिए तो महामारी

कमाई का जरिया बन कर आई है


हाहाकार मचा कर मीडिया ने भी चारो ओर

भ्रम और डर फैलाया है


प्रेस ने भी कहां समझदारी भरा फर्ज निभाया है

बस जीवन बिताये जा रहे हैं कमियां निकालने में


अच्छाई देखने वाली नजरों पर 

तो धूल से सना पर्दा चढ़ाया है


हर कोई बस आपदा को असर बना रहा है


झूठ से सना हुआ झूठा सच परोसा जा रहा है


बस जिम्मेदार लोगों को कोसा जा रहा है


आंकड़ों को भी झूठा साबित करने का आरोप लगाया जा रहा है


प्रेस और मीडिया भी अपने में मगन है


सिर्फ दिखावे के काम में संलग्न है


हाय हाय यही तो असली महामारी है


जिसमें गलती किसी और की 

और आरोप किसी और पर जारी है


यह कैसी महामारी है यह कैसी महामारी है


आरोप-प्रत्यारोपो का खेल

हर तरफ जारी है

हर तरफ जारी है


समय का चक्र चिंतनीय दिख रहा है


व्यक्ति अपनी ही कमियों से

रसातल में गिर रहा है।


वरिष्ठ समाजसेवी, अधिवक्ता एवं लेखिका

डॉ कुसुम पांडेय

सहयोगी दलों के सहयोग से एनडीए तीसरी बार भी अपनी नैया पार लगाने की फिराक मे।

  आचार्य श्रीकान्त शास्त्री, वरिष्ठ पत्रकार  देश में आम चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां बड़ने लगी है और हर पार्टिया ‌अपनी ...